थाना भोजपुर के गांव शकूरपुर में नौवीं क्लास की छात्रा शीतल (15) ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस का कहना है कि फेल होने के कारण छात्रा ने जान दी है।
वह पढ़ाई में कमजोर थी। घरवालों का कहना है कि छात्रा का पिछले दिनों रिजल्ट आया था, जिसमें उसके काफी कम नंबर थे। तब से वह परेशान रहती थी।
शीतल गांव शकूरपुर निवासी श्रीपाल की बेटी थी। रविवार सुबह शीतल की बड़ी बहन जब टिन शेड में झाडू लगाने गई तो फंदे पर शीतल का शव लटका देखा। उसकी चीख निकल गई। आवाज सुनकर परिवार के लोग वहां पहुंचे। परिजनों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और छानबीन की।
रविवार शाम गांव स्थित श्मशान घाट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिवार का मानना है कि शीतल ने शनिवार की देर रात आत्महत्या की होगी। एसओ भोजपुर केके राना ने बताया कि पढ़ाई में कम मार्क्स आने की वजह से छात्रा ने यह कदम उठाया है। शुरुआती जांच में और कोई कारण प्रकाश में नहीं आया है।
खुदकुशी : जिंदगी पर भारी शिक्षा की ‘जंग’
शिक्षा, प्रेम-प्रसंग और घरेलू झगड़े खुदकुशी की जड़ हैं। पढ़ाई की वजह से मरने वालों की तादाद काफी ज्यादा है। पिछले एक साल में हुई खुदकुशी की घटनाओं पर गौर करें तो आंकड़े कुछ यूं बयां करते हैं कि मरने वालों में शिक्षा के लिए तकरीबन 20 प्रतिशत विद्यार्थियों ने आत्महत्या की।
प्यार-मोहब्बत की खातिर खुदकुशी करने वालों का प्रतिशत लगभग 18 रहा। पारिवारिक या घरेलू कलह के चलते सबसे ज्यादा लोग खुदकुशी कर रहे हैं। उनका प्रतिशत करीब 22 है।
12 महीनों के दौरान जिले में 84 लोगों ने मौत को गले लगाया। किसी न जहर खाकर जान दे दी तो किसी ने फांसी पर लटककर। खुदकुशी करने वालों में 18 वर्ष से 35 साल के बीच के लोगों की तादाद सबसे ज्यादा है।
जिंदगी से हार रहे छात्र
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