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बैंक में भी सुरक्षित नहीं है आपका पैसा!

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वो दोनों एक बैंक के लिए काम करते थे, लेकिन अपनी नौकरी गंवाने के बाद दोनों बैंक से गए तो गए साथ ही बैंक के 5,000 क्लाइंट्स का डेटाबेस भी अपने साथ ले गए।
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इसके बाद जो हुआ उसमें सैकड़ों लोगों के करोड़ों रुपयों के वारे-न्यारे हो गए। उनका नाम है सागिर (31) और गोविंद राम (33), जिन्होंने करोड़ों का क्रेडिट कार्ड घोटाला किया और अब जेल की हवा खा रहे हैं।

इस केस को सुलझाने वाले दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने बताया कि इन दोनों ने लगभग 100 लोगों को अपना निशाना बनाया है।

अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर अशोक चंद ने बताया कि पुलिस इन दोनों पर नजर बनाए हुए थी। आखिरकार मंगलवार को दोनों आरोपियों को उत्तरी दिल्ली में सेंट्रो कार में सफर करते वक्त धर-दबोचा गया।
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आकर्षक ऑफर देकर पहले अपने झांसे में फंसाते थे

डीसीपी भीषम सिंह और एसीपी केपीएस मल्होत्रा के नेतृत्व में एक टीम ने दोनों आरोपियों को पकड़ लिया। इनमें से एक बड़ा राव हिंदू क्षेत्र से है, जिसका नाम सागिर है और दूसरा गोविंद राम करोल बाग का है।

अशोक चंद ने आगे बताया कि आरोपी पूर्व बैंक कर्मियों के पास से लैपटॉप, डाटा कार्ड, यूएसबी ड्राइव, पांच मोबाइल फोन, कई राष्ट्रीय और अंतररराष्ट्रीय सिम कार्ड, एक स्कैनर, उपभोक्ताओं के डेटाबेस के प्रिंटआउट, नए क्रेडिट कार्ड के एप्लीकेशन फॉर्म जब्त किया गया है।

पुलिस को पूछताछ के दौरान पता चला क‌ि ये दोनों क्लाइंट्स को आकर्षक ऑफर का झांसा देकर नए क्रेडिट कार्ड लेने के लिए तैयार करते थे। ये दोनों सबसे पहले लोगों से बैंक के टेलीकॉलर बनकर उनसे मुलाकात तय करते थे।

सभी जानकार‌ियां लेकर क्लाइंट का फोन नंबर ब्लॉक करा देते थे

तय तारीख पर क्लाइंट्स से मिलने पर ये दोनों उनसे उनके पुराने क्रेडिट कार्ड दिखाने को कहते थे। फिर वे कार्ड नंबर और सीवीवी नंबर (जो क्रेड‌िट कार्ड के पीछे ल‌िखा होता है) नोट कर लेते थे।

इसके साथ ही नए कार्ड के फॉर्म भरने के समय वो क्लाइंट के इमेल, फोन नंबर और जन्मतिथि जैसी जानकारियां भी मांग लेते थे। सभी जा‌न‌कारियों से लैस होने के बाद इनका अगला काम होता था क्लाइंट के फोन नंबर को ब्लॉक करवाना।

नंबर ब्लॉक हो जाने से उस क्लाइंट के फोन पर क्रेडिट कार्ड या अकाउंट संबंधी किसी तरह की कोई जानकारी नहीं पहुंचती। इसके लिए आरोपी, क्लाइंट के सेल फोन ऑपरेटर को फोन करते थे और फोन खोने की बात कहकर नंबर ब्लॉक करा देते थे।
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बैंक से भी सभी कॉन्टैक्ट डीटेल बदलवा देते थे आरोपी

क्लाइंट का फोन नंबर ब्लॉक कराने के बाद वो बैंक के कस्टमर केयर को फोन कर क्लाइंट के फोन नंबर को बदलकर अपना ही कोई नंबर दे देते थे। इसके साथ ही वो क्लाइंट की इमेल आईडी भी बदलवा देते थे। इस तरह पीड़ित को किसी भी तरह की कोई जानकारी या अलर्ट नहीं मिल पाता था।

क्लाइंट के कॉन्टैक्ट की सभी जानकारियां बदल जाने की वजह से आरोपियों को आसानी से अपने नंबर पर वन-टाइम पासवर्ड मिल जाता था। सागिर और राम पीड़ितों के क्रेडिट कार्ड से निकाले गए पैसे को ई-कॉमर्स के ‌जरिए पहले एयरटेल मनी, वोडाफोन एमपेसा और पेयू जैसे अकाउंट्स में ट्रांसफर करते थे।

उसके बाद दोनों उस पैसे को अपने द्वारा नकली दस्तावेजों की मदद से खोले गए विभिन्न अकाउंट्स में ट्रांसफर कर देते थे। और फ‌िर ये पैसे एटीएम से निकाल लिए जाते थे।

साभारः टाइम्स ऑफ इंड‌िया
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