दिल्ली की एक अदालत ने दहेज हत्या के मामले में कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा जांच में लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। अदालत ने इन अधिकारियों को जागरूक करने के लिए सरकार को निर्देश जारी करने के लिए कहा है।
रोहिणी जिला अदालत ने मामले में जानकी (18) के पति विक्की को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दूसरी ओर जांच में लापरवाही के लिए कार्यकारी मजिस्ट्रेट को कड़ी फटकार लगाई।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ कामिनी लाउ ने अपने फैसले में कहा कि दहेज हत्या के मामलों में इन अधिकारियों को मौके पर जाकर जांच करना अनिवार्य है। आमतौर पर यह देखने में आया है कि यह अधिकारी कभी कभार ही मौके पर जाकर जांच करते हैं। अदालत ने आदेश की कॉपी गृह विभाग के प्रधान सचिव को भेजने का निर्देश दिया।
अदालत ने मृतका के पति को दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
अभियोजन का आरोप था कि विक्की शराब पीकर अपनी पत्नी जानकी (18) को पीटता था और पैसों की मांग करता था। हालांकि अदालत ने विक्की के माता-पिता को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। अभियोजन के मुताबिक विक्की की शादी दिसंबर 2010 में जानकी से हुई थी। उसने शराब के नशे में जानकी की गला दबाकर हत्या कर दी थी।