इस बीच रास्ते में स्कूटी सवार बदमाशों ने उनसे बैग छीनने का प्रयास किया। अभिषेक ने कार से टक्कर मारकर बदमाशों को गिरा दिया, लेकिन आरोपी स्कूटी मौके पर छोड़कर कैश लूटकर फरार हो गए।
एसीपी राकेश दीक्षित, इंस्पेक्टर विदेश सिंघल, दिनेश आर्य, निपुन कुमार, एसआई केके शर्मा, अरुण सिंधु, प्रमोद कुमार व अन्यों की टीम ने जांच शुरू की।
सोमवार को कार चालक अभिषेक से शक के आधार पर पूछताछ हुई तो वह टूट गया। उसने बताया कि उसे पता था कि दफ्तर में मोटी रकम है। इसकी सूचना उसने अपने दोस्त राज उर्फ गोली को दी।
राज ने आगे शानू को खबर दी। योजना बनाकर वारदात को अंजाम दिया गया। अभिषेक से पूछताछ के बाद सोमवार शाम को ही पुलिस ने बाकी पांचों आरोपी राज, शानू, आकाश व अलीदाद खान को उत्तर-पूर्वी दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया।
अभिषेक ने बताया कि उसे चालक की नौकरी करते हुए छह ही माह हुए थे। अभिषेक की कई गर्लफ्रेंड भी थीं। उनका खर्चा उठाने के लिए रुपयों की जरूरत थी। इधर गैंग लीडर शानू की भी कई गर्लफ्रेंड थी।
वह शादी करने के बाद भी अपनी एक गर्लफ्रेंड के साथ लिव इन में रहता है। उसे भी मोटी रकम की जरूरत थी। शानू ने बताया कि उसके पिता कानपुर के जिला अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर थे।
18 साल पहले उनकी मौत के बाद शानू की मां उसे लेकर दिल्ली आ गई थी। यहां शानू बुरी संगत में पड़कर लुटेरा बन गया। उसके खिलाफ लूटपाट के 12 से अधिक मामले दर्ज हैं।