दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में शुक्रवार दोपहर महिला आईपीएस अधिकारी से छेड़छाड़ के आरोपी अस्पतालकर्मी बच्चू खान को कड़े सुरक्षा इंतजाम के बीच शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया।
छेड़छाड़ समेत कई अन्य धाराओं में गिरफ्तार बच्चू को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। पुलिस बच्चू के दोनों साथियों की भी तलाश कर रही है। गौरतलब है कि शुक्रवार दोपहर को पश्चिम जिले में तैनात आईपीएस अधिकारी लूटपाट के मामले के एक पीड़ित से मिलने डीडीयू अस्पताल में आई थी।
आरोप है कि वहां बच्चू खान ने अधिकारी को देखकर सीटी बजाई और अभद्र इशारे किए। वारदात के बाद पुलिसकर्मियों ने बच्चू को बुरी तरह पीटा, जिसके बाद से वह अस्पताल में भर्ती था। मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल के कर्मचारियों ने खूब हंगामा किया। शनिवार को बच्चू की गिरफ्तारी का भी वह विरोध कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने विरोध के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया।
नर्सिंग स्टाफ ने की हड़ताल
दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में आईपीएस महिला अधिकारी से छेड़छाड़ के बाद अस्पतालकर्मी से पुलिसकर्मियों की मारपीट के विरोध में शनिवार को नर्सिंग स्टाफ हड़ताल पर रहा।
इसके चलते इमरजेंसी, गाइनी और सर्जरी विभाग समेत जांच लैब में जांच करने वाला कोई नहीं था। इससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बेहाल मरीजों की समस्या सुलझाने के लिए दिल्ली सरकार के विशेष स्वास्थ्य सचिव भी पहुंचे, लेकिन देर शाम तक पुरुषकर्मी को छुड़वाने, दर्ज एफआईआर को वापस लेने और अस्पताल में सुरक्षा मुहैया करवाने की मांग पर अड़े रहे।
बिना इलाज के वापस लौटे मरीज
पश्चिमी दिल्ली के सबसे बड़े सरकारी दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में 600 से अधिक नर्सिंग स्टाफ है, लेकिन शुक्रवार की घटना के बाद उन्होंने शनिवार को हड़ताल पर रहने का ऐलान कर दिया। हालांकि मरीजों का हवाला देते हुए प्रति वार्ड एक-एक नर्सिंग स्टाफ को काम करने की इजाजत भी दे दी, लेकिन 40 मरीजों के प्रति वार्ड में एक नर्सिंग स्टाफ से काम नहीं चला।
गिरफ्तार पुरुष नर्सिंग स्टाफ को छुड़वाने, उक्त कर्मी पर दर्ज एफआईआर को वापस लेने और अस्पताल परिसर में सुरक्षा मुहैया करवाने की मांग को लेकर नर्सिंग स्टाफ यूनियन शनिवार सुबह होते ही प्रशासनिक विभाग के बाहर हड़ताल पर बैठ गया। इसका असर सुबह ही सर्जरी विभाग में देखने को मिला, जिसके चलते कई ऑपरेशन रद्द हो गए।
वहीं, इमरजेंसी सेवाओं, जच्चा-बच्चा, मेडिसिन और जांच लैब में मरीजों को अधिक परेशान होना पड़ा, क्योंकि जांच के लिए डॉक्टरों का सहयोग देने के लिए कोई स्टाफ नहीं था। लैब से अधिकतर मरीजों को वापस लौटना पड़ा।
डीडीयू के एमएस डॉ. भरत ने कहा कि हड़ताल का स्वास्थ्य सेवाओं पर कोई अधिक असर नहीं हुआ, क्योंकि सभी डॉक्टर खुद मरीजों की जांच कर रहे थे। मामला सुलझाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।