अरावली में फिर एक तेंदुए की मौत हो गई है। इसका शरीर क्षतविक्षत हो चुका था। मौके पर जांच करने वाले वन विभाग व वन्य जीव विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तेंदुए के शरीर पर किसी प्रकार के चोट का निशान नहीं हैं।
विज्ञापन
इनका यह भी कहना है कि तेंदुए की मौत करीब 25 दिन पहले हुई होगी। इसका पोस्टमार्टम बादशाहपुर पशु अस्पताल में करा दिया गया है। अब विभाग को इसकी रिपोर्ट के आने का इंतजार है। तभी खुलासा हो सकता है कि इसके मौत का असली कारण क्या है।
शनिवार देर शाम सोहना के अरावली क्षेत्र स्थित गैरतपुर बांस गांव के कुछ लोगों ने पहाड़ियों के बीच झाड़ियो में एक मृत तेंदुए को देखा। इसे देखकर वह घबरा गए। आनन-फानन में उन्होंने इसकी जानकारी गांव के सरपंच को दी। सरपंच ने इसकी सूचाना तुरंत वन विभाग के अधिकारियों को दी।
विज्ञापन
शाम होने के कारण विभाग की टीम वहां नहीं गई
शाम होने के कारण विभाग की टीम वहां नहीं गई। रविवार सुबह वन विभाग और वन्य जीव विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मृत तेंदुआ को झाड़ियों के बीच से उठा बादशाहपुर पशु अस्पताल पहुंचाया गया। जहां पर उसका पोस्टमार्टम करा उसे गाड़ दिया गया। आगे की जांच के लिए उसका बिसरा सुरक्षित रखवा लिया गया है।
इसकी रिपोर्ट मंगलवार को आने की संभावना है। वन्य जीव विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तेंदुए की उम्र लगभग तीन साल की है। डीएफओ (वाइल्ड लाइफ) आरके भाटिया के मुताबिक उसकी मौत प्राकृतिक कारणों से भी हो सकती है। विभाग का यह भी अनुमान है कि अधिक गर्मी से प्यास के कारण उसकी मौत हो सकती है।
विभाग बीमारी का भी हवाला दे रहा है। वन्य जीव विभाग के जिला निरीक्षक कंवरपाल सिंह का कहना है कि तेंदुआ की मौत के असली कारणों की जानकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मिल पाएगी। इसका इंतजार किया जा रहा है। मंगलवार को रिपोर्ट आने की संभावना है।
शावक वाले स्थान से थोड़ी दूरी पर मरा मिला है तेंदुआ
शावक वाले स्थान से थोड़ी दूरी पर मरा मिला है तेंदुआ...
सोहना के अरावली क्षेत्र में जहां तेंदुआ मृत मिला है वह स्थान उससे थोड़ी ही दूरी पर है जहां पर जनवरी में एक शावक पेड़ से बंधा मिला था। वन्य जीव प्रेमियों का कहना है कि इस क्षेत्र में तेंदुओं पर काफी संकट है। ऐसे में वन्य जीव विभाग को उनकी सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करने की जरूरत है।
दो साल में सात तेंदुओं की मौत, नहीं खुली अधिकारियों की नींद
जिस अरावली को वन्य जीवों की सुरक्षा का कवच माना जाता रहा है आज वहीं तेंदुओं के रक्त से लहूलुहान होती जा रही है। दो साल में यहां सात तेंदुओं की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद वाइल्ड लाइफ अधिकारी इस मामले को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं।
इन मौतों से वन्य जीव विभाग की कार्यप्रणाली और नीयत पर सवाल खड़ा होने लगा है। वन्य जीव प्रेमियों का कहना है कि इनकी सुरक्षा की बात तो दूर इनके मौत के रहस्यों का खुलासा तक करने में विभाग लगातार अक्षम रहा है। हर घटना के बाद विभाग के अधिकारियों का रटा रटाया जवाब होता है कि सुरक्षा का इंतजाम करेंगे।
लेकिन उसके बाद एक कदम भी आगे नहीं बढ़ते। उनकी इस लापरवाही से सिर्फ तेंदुए ही नहीं सभी वन्य जीवों के जीवन पर संकट के बादल छाए हुए हैं। अरावली क्षेत्र में दो साल में सात तेंदुओं की मौत ने हर किसी को हैरत में डाल दिया है। लोगों का कहना है कि इस दौरान एक के बाद एक तेंदुओं की मौत कैसे हो रही है।
इसके पीछे साजिश की बू आ रही है। अरावली के सोहना क्षेत्र स्थित गांव गैरतपुर बांस से सटे जंगलों और पहाड़ियों में एक मृत तेंदुआ मिला। इसकी बॉडी क्षतविक्षत मिली। विभाग के अधिकारी यह कह रहे हैं कि इसकी मौत 25 दिन पहले हुई होगी।
इससे सवाल यह उठता है कि जिसकी जिम्मेदारी इनकी सुरक्षा करने की है उन्हें इसकी भनक इतनी देरी से क्यों लगी। अगर गांव वाले इसकी सूचना वन विभाग को नहीं देते तो यह राज ही बना रह जाता।
तेंदुओं पर संकट
अप्रैल 2014: चार तेंदुओं की मौत मानेसर गोल्फ कोर्स परिसर के आसपास संदिग्ध अवस्था में हुई थी।
नवंबर 2014: मानेसर के सहरावन गांव के पास सड़क दुर्घटना में 12 वर्षीय तेंदुए की मौत हो गई थी।
मई 2015: गुड़गांव-फरीदाबाद पर एक तेंदुए की मौत सड़क दुर्घटना में हो गई थी।
मई 2016: सोहना क्षेत्र के गैरतपुर बांस के जंगलों में मृत मिला तेंदुआ।
कब-कब दिखाई दिए तेंदुए
जनवरी 2016 में गैरतपुर बास से सटे जंगलों में पेड़ से बंधा मिला था शावक।
13 जनवरी, 2015: सोहना के दमदमा इलाके में दिखा था तेंदुआ और शावक।
08 मई 2015: मांगर के पास सड़क पर तेंदुआ दिखा।
-06 अगस्त, 2015: मानेसर के पास अरावली में तेंदुआ दिखने से मचा था हड़कंप।
पीट-पीटकर मार डाला था तेंदुआ
12 जनवरी 2011 को फरीदाबाद के खेड़ी गुजरान में भीड़ ने एक तेंदुए को पीट-पीटकर मार डाला था।
अब तक नहीं बन सका चेक डैम
अरावली के क्षेत्र में वन्य जीवों के लिए कई वर्षो से क्षेत्र में चेक डैम बनाने की बात चल रही है, लेकिन प्रदेश सरकार ध्यान देने को तैयार नहीं। चेक डैम बनने से जगह-जगह पानी जमा होता। पानी धीरे-धीरे नीचे जाता। इससे जहां भूमिगत जल स्तर में सुधार होता, वहीं आसपास हरियाली बढ़ती। पर्यावरणविद् चेतन अग्रवाल कहते हैं कि भोजन से अधिक प्यास बुझाने के लिए तेंदुए या अन्य वन्य जीव रिहायशी इलाकों में भागते हैं। जिसकी वजह से यह इन इलाकों में दिखने लगे हैं।
लगातार होती तेंदुओं की मौत ने साबित कर दिया है वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट में बड़े परिवर्तन की जरूरत है। इनके पास न कोई पावर है और न ही काम करने की इच्छा। -नरेश कादयान, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट