मुरादनगर के मोरटा गांव में सोमवार रात 100 रुपये की मजबूरी ने दो किशोरों की जान ले ली। दोनों किशोर शादी में लाइटें पकड़कर चलने का काम करते थे।
बारात चढ़त के दौरान जनरेटर के करंट ने लाइटें उठाने वाले पांच किशोरों को चपेट में ले लिया था। दो की मौत हो गई। जबकि तीन की हालत गंभीर है।
बग्घी सवार दूल्हा भी करंट की चपेट में आने से बाल-बाल बचा। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर अर्थला के बैंड संचालक नौशाद एवं असगर को गिरफ्तार कर लिया। अर्थला का ही बग्घी चालक अमित फरार है।
मोरटा गांव निवासी बाबूराम प्रजापति की बीए पास निशक्त बेटी सपना की बारात बुलंदशहर के बीबीनगर थाना क्षेत्र के निर्सुखा गांव से आई थी। बीटेक पास दूल्हा हरवंश पुत्र हरि सिंह भी निशक्त है।
सोमवार रात 7.30 बजे चढ़त के दौरान जनरेटर चालू होते ही उससे जुड़े तार में करंट उतर गया। इससे बड़ी लाइट लेकर खड़े पांच किशोर मजदूर बेहोश होकर नीचे गिर पड़े। तुरंत जनरेटर बंद कर उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
डॉक्टरों ने सचिन (15) पुत्र दिनेश निवासी नीलमणी कॉलोनी, अर्थला और नाजिम (15) पुत्र सगीर संजय कालोनी अर्थला को मृत घोषित कर दिया।
वहीं, इरफान पुत्र इकबाल, टीटू पुत्र सुदेश एवं सुंदर पुत्र रामबाबू की हालत गंभीर बनी है। तीनों मुरादनगर के आईटीएस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
अधिकारी भी नहीं देते नियम-कायदों का ध्यान
विद्युत सुरक्षा विभाग के अफसर हर महीने लाखों रुपये वेतन लेने के बाद भी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। इससे खुलेआम सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो रही है।
सार्वजनिक स्थलों पर मनमाने तरीके से तारों का जाल फैलाया जाता है, जिससे हादसे हो रहे हैं। अफसरों ने मामले की जांच तक नहीं की है।
यह है नियम
किसी भी निजी या सार्वजनिक स्थान पर पावर का उत्पादन या प्रयोग करने के लिए विद्युत सुरक्षा विभाग की एनओसी जरूरी है।
विभाग के अधिकारी प्रयोग किए जाने वाले केबल, सर्किट, प्वाइंट व अन्य विद्युत उपकरणोें की गुणवत्ता का परीक्षण करते हैं।
यह हो सकती है कार्रवाई
बिना सुरक्षा प्रमाण पत्र के एनर्जी उत्पादन या प्रयोग करने पर रिपोर्ट दर्ज कराकर जुर्माना वसूलने का प्रावधान है।
यदि सार्वजनिक स्थल पर ऐसा किया जाता है तो कारावास भी हो सकता है। पावर सेफ्टी अफसरों को इसके लिए छापामारी कर जांच करनी होती है।
यह है हकीकत
पावर सेफ्टी डिपार्टमेंट की टीम कार्रवाई के लिए नहीं निकलती है। ऑफिस से ही सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं।
ठेकेदारों की मिलीभगत से विद्युत सुरक्षा मानकों से खिलवाड़ करने का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। दो साल से विभाग ने किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है।