साकेत अदालत स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश योगेश खन्ना ने पीड़ित दो महिलाओं के अपने बयान से मुकर जाने के चलते रेप के आरोपी वकील को बरी कर दिया।
अपने फैसले में न्यायाधीश ने कहा कि महिलाओं के बयान से स्पष्ट है कि उनसे रेप नहीं हुआ। आरोपी ने विवाह का वायदा कर शारीरिक संबंध भी नहीं बनाए।
ऐसे में अपराध साबित करने के लिए साक्ष्य नहीं है और आरोपी संदेह का लाभ पाने का हकदार है। वहीं मुकदमे की सुनवाई के दौरान दोनों महिलाएं पुलिस को दिए अपने बयानों से मुकर गईं।
उन्होंने कहा कुछ गलतफहमी के कारण यह मामला दर्ज करवा दिया था। उनसे दुष्कर्म नहीं हुआ। अभियोजन पक्ष के अनुसार एक महिला का वैवाहिक वाद लड़ रहे वकील ने शादी का झांसा देकर उससे शारीरिक संबंध बनाया।
एक दिन जब महिला वकील के घर गई तो वहां दूसरी महिला मिली। उसे भी शादी का झांसा देकर वकील चार साल से शारीरिक संबंध बना रहा था। दोनों महिलाओं ने वकील के खिलाफ शादी का झांसा देकर रेप करने का मामला दर्ज कराया था।