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लाखों की बेशकीमती मूर्तियां चुराने वाला पकड़ा गया

Wed, 15 Jun 2016 09:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
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मूर्त‌ि चोर लाल घेरे में - फोटो : अमर उजाला
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सीआईए बॉर्डर पुलिस टीम ने 26 मई की रात सराय ख्वाजा स्थित गगन स्टूडियो से चुराई गईं करीब 50 लाख रुपये कीमत की 14 में से 12 मूर्तियां बरामद कर ली हैं। पुलिस ने मूर्ति चुराने वाले संतू उर्फ संतोष निवासी सफेदा वाली गली, पल्ला को गिरफ्तार किया है। चोरी की मूर्तियां खरीदने वाले कबाड़ी राजू निवासी जैतपुर दिल्ली और और शाहिद निवासी पुल प्रह्लादपुर, दिल्ली को भी गिरफ्तार कर इनके कब्जे से मूर्तियां बरामद कीं।
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अशोका एंक्लेव एक्सटेंशन में रहने वाले गगन विज पारंपरिक ढंग से मूर्तियां गढने वाले देश के चुनिंदा हस्तशिल्पकारों में हैं। सराय ख्वाजा में गगन स्टूडियो के नाम से उनका मूर्तियों का शोरूम और फाउंड्री है।

26 मई की रात उनके स्टूडियो से तांबे और ब्रास की 14 मूर्तियां चोरी हो गई थीं। बेशकीमती मूर्तियों को खोजने का जिम्मा सीआईए बदरपुर बॉर्डर को दिया गया था। टीम के हेड कांस्टेबल नरेंदर सिंह को सोमवार शाम मुखबिर से सूचना मिली कि पल्ला में कबाड़ का काम करने वाला राजू कबाड़ी कुछ बेशकीमती मूर्तियां बेचने के लिए ग्राहक की तलाश कर रहा है।
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इस पर उन्होंने राजू के यहां छापामारी की। वहां से पुलिस को कुछ मूर्तियां बरामद हुईं। राजू ने बताया कि सफेदावाली गली का संतू उर्फ संतोष उसको 260 रुपये किलो के भाव से यह मूर्तियां बेच गया है। राजू ने बताया कि उसने कुछ मूर्तियां पुल प्रह्लादपुर में कबाड़ी का काम करने वाले शाहिद को भी बेची हैं।
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मूर्त‌ि चोर - फोटो : अमर उजाला
​पुलिस ने वहां भी छापामारी कर कुल 12 मू‌र्त‌ियां बरामद कीं। देर शाम पुलिस ने संतोष को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस हिरासत में संतोष ने बताया कि उसको किसी ने कहा था कि मूर्तियां बनाने में सोना इस्तेमाल किया जाता है। इन्हें सोने की समझ कर चोरी की थी। बताया कि 27 मई की रात उसने दो मजदूर लिए और एक ऑटो किराए का लेकर आया था।

मजदूरों को उसने बताया था कि शिफ्ट करने के लिए सामघान उठाना है। यह मूर्तियां उसने राजू कबाड़ी को 20 हजार रुपये में बेच दी थीं। सीआईए इंचार्ज नवीन कुमार और पुलिस प्रवक्ता डीसीपी सेंट्रल वीरेंद्र विज ने बताया कि संतोष पहले भी चोरी के जुर्म में पकड़ा जा चुका है। तीनों को रिमांड पर लेकर बाकी बची दो मूर्तियों की जानकारी ली जाएगी।

सिर्फ 30 हजार रुपये दिखाई थी कीमत
गगन विज और पुलिस प्रवक्ता डीसीपी सेंट्रल वीरेंद्र विज जिन मूर्तियों की कीमत 50 लाख रुपये बता रहे हैं केस दर्ज करते समय सराय ख्वाजा पुलिस ने इनकी कीमत महज तीस हजार रुपये लिखी थी। गगन विज के मुताबिक चोरी गई मूर्तियां पांच से नौ लाख रुपये कीमत की रेंज में थीं। पुलिस किस तरह बड़ी वारदात को हल्का करती है गगन स्टूडियो की चोरी इसका उदाहरण है। सराय ख्वाजा पुलिस ने इन मूर्तियों की कीमत उनकी कला से न लगाकर महज उसमें इस्तेमाल हुई धातु के वजन के बराबर लगाई।

लॉस्ट वैक्स तकनीकी से बनाते हैं मूर्तियां
गगन विज के मुताबिक वह मूर्ति कला की प्राचीन लॉस्ट वैक्स तकनीक का इस्तेमाल कर कलाकृतियां ढालते हैं। इसमें मूर्ति पहले मोम पर उकेरी जाती है। मोम की मूर्ति पर गीली मिट्टी की मोटी पर्त चढ़ाकर उसे पहले धूप में सुखाया जाता है उसके बाद भट्ठी में पक्का लिया जाता है। इस प्रकिया में अंदर का मोम पिघल कर बाहर आ जाता है और मूर्ति का सांचा तैयार हो जाता है। इसमें तांब, ब्रास आदि पिघला कर ढाला जाता है। ठंडा होने पर सांचा तोड़कर मूर्ति निकाली जाती है। उन्होंने बताया कि हर मूर्ति के लिए अलग सांचा बनाना पड़ता है यही वजह है कि उन्होंने कभी दूसरी मूर्ति नहीं बनाई। एक मूर्ति बनाने के लिए रिसर्च करने और मोम का मॉडल तैयार करने में चार से छह माह का समय लगता है।
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