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बलात्कार के बाद जबरन कर ली शादी

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दुष्कर्म व जबरन शादी के मामले में डाबड़ी निवासी युवक को दोषी ठहराते हुए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दस साल कैद व जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी युवक की मां को दुष्कर्म के लिये प्रेरित करने के लिये सात साल कैद की सजा सुनाई है।
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अदालत ने कहा कि दोषी ने पीड़िता को अपने जाल में फंसा लिया था। उनके दोनों के बीच शादी सजा के आड़े नहीं आनी चाहिए। द्वारका जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट ने दोषी को सजा सुनाते हुए कहा कि ऐसा लगता है पीड़िता ने दुष्कर्म के कारण ही युवक से शादी की सहमति दी।

यह नहीं कहा जा सकता है कि शादी होने के कारण दुष्कर्म का अपराध खत्म हो गया। अदालत ने तीस अक्तूबर के अपने फैसले में कहा कि दोषी व पीड़िता के बीच शादी नाममात्र और पीड़िता को काबू में रखने का हथकंडा है।
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युवक की मां पर कोर्ट ने क्यों दिखाई सख्ती

शादी का तथ्य आरोपी को दोषी ठहराने के बीच नहीं आना चाहिए। युवक की मां के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए अदालत ने कहा कि महिला होने के बावजूद पीड़िता के आंसुओं का उस पर कोई असर नहीं हुआ।

उसके सामने उसके बेटे व एक अन्य शख्स ने जबरन दुष्कर्म किया। पीड़िता की मदद के लिये आगे आने के बजाय उसने अपने बेटे व दूसरे शख्स को दुष्कर्म के लिए प्रेरित किया।

अभियोजन के मुताबिक पीड़िता ने डाबड़ी थाने में 12 दिसंबर 2011 को शिकायत दर्ज करवाई थी। पीड़िता का आरोप था कि वह वर्ष 2008 में एनआईआईटी की छात्रा थी, उस समय युवक ने उससे दोस्ती करके उसे दुष्कर्म किया। युवक ने उसे 21 जनवरी 2010 को अपने घर बुलाया और वहां नशीला ड्रिंक देकर अपनी मां की मौजूदगी में दुष्कर्म किया।
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