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आनंद जोशी के तनाव का तर्क खारिज, कोर्ट ने पूछा गृह मंत्रालय की फाइलें कैसे पहुंची घर

Mon, 16 May 2016 07:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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आनंद जोशी
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गैर सरकारी संगठनों से वित्तीय लाभ पाने के कथित आरोप में फर्जी तरीके से एफसीआरए नोटिस भेजने के मामले में गिरफ्तार केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंडर सचिव आनंद जोशी को अदालत ने पांच दिन के लिए सीबीआई रिमांड पर भेज दिया। 
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अदालत ने बचाव पक्ष के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उनके मुवक्किल को फंसाया जा रहा है और कुछ अरसा पूर्व जोशी व उनकी पत्नी पर बिजली गिर गई थी और तब से वे डिप्रेशन के शिकार है। पटियाला हाउस स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप है। उसके घर से कार्यालय की कई फाईलें बरामद हुई है। 

अदालत ने कहा कि आरोपी से पूछताछ जरूरी है, ऐसे में वे सीबीआई के आग्रह को स्वीकार कर आरोपी का पांच दिन का रिमांड मंजूर करते है। आरोपी को सीबीआई ने कल ही पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर इलाके से गिरफ्तार किया था। 
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इससे पूर्व जोशी को अदालत के समक्ष पेश किया गया व जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि एनजीओ की फाइलें गृह मंत्रालय से गायब थी और उक्त फाइलें आरोपी के घर से बरामद की गई है। जोशी फाइलें घर ले जाने के लिए अधिकृत नहीं था। उन्होंने कहा कि आरोपी को कल गिरफ्तार किया गया था लेकिन वह जांच में सहयोग नहीं कर रहा। आरोपी से यह भी पता करना है कि वह फाइलें अपने घर कैसे ले गया था। 
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टीम के घर पहुंचने पर गायब हो गया था जोशी

आनंद जोशी - फोटो : ani
उन्होंने कहा कि जोशी बेईमानी से विदेशों से पैसे लेने वाले एवं एफसीआरए 2010 के तहत पंजीकृत काफी एनजीओ व सोसायटियों को नोटिस जारी करता था। इसके बाद वह इन एनजीओ से पैसे मांगता था।

जांच अधिकारी ने कहा कि इन संगठनों में से कुछ जैसे केयर इंडिया, स्नेहालया चैरिटेबल ट्रस्ट, भारतीय एचआईवी-एड्स एलायंस और अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक महासंघ ने आरोप लगाया है कि जोशी ने उनके प्रतिनिधियों को नोटिस देकर बुलाया व गैरकानूनी तरीके से पैसे मांगे। उन्होंने कहा कि जब सीबीआई टीम जोशी के घर गई तो वह घर पर नहीं मिला और फोन बंद कर फर्जी पत्र छोड़ कर गायब हो गया था। ऐसे में रिमांड प्रदान किया जाए।

वहीं दूसरी तरफ बचाव पक्ष की और से पेश अधिवक्ता ने सीबीआई के तर्कों को गलत बताते हुए कहा कि उनके मुवक्किल ने फोन बंद नहीं किया था बल्कि उज्जैन में उसका फोन गुम गया था। इसके अलावा 24 वर्ष के लंबे कैरियर में उसे एक भी कार्यालय ज्ञापन जारी नहीं किया गया। स्पष्ट है कि उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है।

जोशी का नाम सबरंग ट्रस्ट की कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ संबंधित फाइलों के गायब होने पर आया था। जोशी 11 मई को गाजियाबाद स्थित अपने घर से गायब हो गया था और उसने घर में पत्र छोड़ा था कि उसे परेशान किया जा रहा है।
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