थियेटर एज के डायरेक्टर जुल्फिकार खान के खिलाफ बच्चों से कुकर्म मामले में सोमवार को गवाही देने आए एक पीड़ित को सरेआम कोर्ट परिसर से अगवा कर लिया गया। सुबह केस में चीफ होने के बाद दो बजे से पीड़ित का क्रास एग्जामिनेशन शुरू होना था। करीब सवा एक बजे लंच ब्रेक के दौरान पीड़ित को एक युवक कोर्ट परिसर से ही धमकाकर साथ ले गया। गेट के पास पहले से मौजूद तीन अन्य युवक उसे कार में बैठाकर सेक्टर-45/46 की ओर ले गए।
इस दौरान उन्होंने उसका मोबाइल भी उससे छीनकर अपने पास रख लिया। इसके बाद चारों ने उसे धमकाया कि अगर उसने जुल्फिकार के खिलाफ गवाही दी तो उसे और उसके परिवार को जान से मार देंगे। करीब सवा घंटे तक आरोपी पीड़ित को धमकाते रहे और बाद में करीब ढाई बजे उसे फिर से जिला अदालत के गेट के पास छोड़ गए। इसके बाद पीड़ित ने कोर्ट को इस बारे में अवगत कराया।
कोर्ट ने मामले को संज्ञान में लेते हुए पीड़ित से अकेले में बातचीत की। इसके बाद उन्होंने अभियोजन पक्ष से कोर्ट की सर्टिफाइड कॉपी लेकर एसएसपी से शिकायत करने को कहा। मामले में अगली सुनवाई 25 मई को होगी।
शिकायतकर्ता को भी धमका चुके हैं
यौन शोषण केस में फंसे एनजीओ डायरेक्टर जुल्फीकार खान
- फोटो : फाइल फोटो
केस में शिकायतकर्ता कंवरपाल पहले ही पुलिस से जुल्फिकार के भतीजे और अन्य परिचितों से खुद को जान का खतरा बता चुका है। इसके लिए उसने पुलिस से सुरक्षा की मांग की थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने दो महीने पहले भी पुलिस से सुरक्षा की मांग करते हुए पुलिस को पत्र दिया था। बावजूद इसके उसे आज तक सुरक्षा नहीं दी गई।
पिछले साल पीड़ितों को धमकाया था
पिछले साल अक्तूबर में भी मामले में मुख्य गवाह और पीड़ितों को जुल्फिकार के खिलाफ गवाही देने पर धमकाया गया था। जुल्फिकार खान के भतीजे अख्तेदार खान उर्फ लाला, गीता देवी और नीरज के खिलाफ पीड़ितों ने धमकाने के बाबत आईजी को शिकायत देकर सुरक्षा की गुहार लगाई थी। उनका कहना था कि जब से वह इस केस में शिकायतकर्ता बने हैं तब से जुल्फिकार के करीबी उन्हें धमका रहे हैं।
साथ ही उन्हें शिकायत वापस न लेने के बदले में जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। इसलिए उन्होंने आईजी से इस मामले में मदद और सुरक्षा मांगी थी। आईजी के निर्देश पर तीनों के खिलाफ पीड़ितों को धमकाने, आपराधिक तरीके से रास्ता रोकने, जबरन घर में दाखिल होने की धाराओं में केस दर्ज किया गया था। लेकिन, पीड़ितों में से किसी को भी सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई।