भारतीय उपमहाद्वीप में अल कायदा के पांच कथित आतंकियों ने उन पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। दिल्ली पुलिस का आरोप था कि इन कथित आतंकियों ने आतंकी संगठन का बेस बनाने के लिये भारतीय युवकों की भर्ती के लिए आपराधिक साजिश रची।
दिल्ली पुलिस ने इन आरोपियों को दिसंबर 2015 से जनवरी 2016 के बीच अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया था। पटियाला हाउस स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रीतेश सिंह के समक्ष आरोपों पर बृहस्पतिवार को बहस शुरू हो गई।
कोर्ट के समक्ष आरोपों को खारिज करते हुए आरोपियों ने खुद को बेकसूर बताया। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने मोहम्मद आसिफ, जफर मसूद, मोहम्मद अब्दुल रहमान, सैयद अंजार शाह व अब्दुल सामी के खिलाफ अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता एमएस खान ने कोर्ट में कहा कि आरोपियों पर मुकदमा चलाने के लिए दिल्ली पुलिस के पास कोई पुख्ता साक्ष्य नहीं है।
कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ जारी किया था गैर जमानती वारंट
कोर्ट
दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार पांच आरोपियों के अलावा 12 फरार आतंकियों को भी चार्जशीट में नामजद किया है। इन आरोपियों के खिलाफ कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया था।
पुलिस ने जिन आरोपियों को फरार बताया है उनमें सैयद अख्तर, सनाउल हक, मोहम्मद शरजील अख्तर, उस्मान, मोहम्मद रेहान, अबू सुफियान, सैयद मोहम्मद अरसियान, सैयद मोहम्मद जिशान अली, सबील अहमद, मोहम्मद शाहिद फैजल, फरहतुल्लाह गौरी व मोहम्मद उमर शामिल हैं। पुलिस ने इन सभी आरोपियों को यूएपीए के तहत नामजद किया है।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आसिफ की गिरफ्तारी के बाद 14 दिसंबर 2015 को एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस का आरोप था कि आतंकी संगठन का एक गुट यूपी के संभल में सक्रिय था।
ये आतंकी सोशल मीडिया व मोबाइल फोन के जरिये पाकिस्तान, ईरान व तुर्की के आतंकियों के संपर्क में थे। ये आतंकी इन देशों की यात्रा कर चुके थे और संगठन की फंडिंग के पैसे का इंतजाम करते थे और युवकों को जेहाद में शामिल होने के बाद उकसाते थे।