वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि 2008 में अहमदाबाद ब्लास्ट के बाद उसे पुलिस के डर से गुजरात छोड़ना पड़ा। सूरत से भागकर वह खंडवा पहुंचा।
वहां कुछ दिन रुकने के बाद वह मध्यप्रदेश के जबलपुर चला गया। वहां से पटना, रांची, छपरा होते नेपाल निकल गया। नेपाल के विराटनगर में वह सिमी संगठन के करीबी निजाम खान के पास पहुंचा।
निजाम नेपाल में एक एनजीओ चलाता था। निजाम की मदद से उसने वहां रहना शुरू कर दिया। विराटनगर में उसने एक स्कूल में अंग्रेजी पढ़ाना शुरू कर दिया।
बाद में निजाम की मदद से उसने नेपाल की नकली आईडी जुटा ली। इस बीच वह आईएम के संस्थापक रियाज भटकल के संपर्क में रहा। इसी दौरान रियाज ने उससे सऊदी अरब जाकर आईएम के लिए फंड जुटाने के लिए कहा।
रियाज चाहता था कि भारत में दुबारा से आईएम खड़ा हो। 2015 तक नेपाल में रहने के बाद तौकीर नेपाली पासपोर्ट पर अब्दुल रहमान के नाम से रियाद, सऊदी अरब चला गया। वहां उसने कई स्टोर में नौकरी की।
इसी दौरान वह सिमी व आईएम के समर्थक लोगों के साथ बैठक करता रहा। जून 2017 में वह सऊदी अरब से भारत वापस आ गया। यहां यूपी में अलग-अलग जगह छुपकर अपने पुराने साथियों के साथ बैठक करता रहा।
किसी भी हाल में उसे दुबारा से आईएम को खड़ा करना था। पुलिस तौकीर से पूछताछ कर इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यूपी में वह किन-किन लोगों के संपर्क में था।