राज्यपाल से शिकायत होने से बौखलाकर थाना पुलिस ने सागर को 18 सितंबर की सुबह चार बजे मुठभेड़ में गिरफ्तारी दिखाकर जेल भेज दिया था। जिसका समाचार 19 सितंबर के अंक में ‘रात में राज्यपाल से शिकायत, सुबह युवक को मुठभेड़ के बाद भेजा जेल’ शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसमें गांव मैथना जगतपुर निवासी हेमंत शर्मा पुत्र संतोष शर्मा भी नामजद था।
परिजनों की शिकायत के बाद हुआ खुलासा
20 सितंबर को गांव मैथना जगतपुर निवासी 40-50 ग्रामीण एकत्रित होकर एसएसपी संतोष कुमार सिंह से मिले और इंस्पेक्टर पर निर्दोष युवक को लूट के मामले में फर्जी फंसाये जाने की शिकायत की। एसएसपी ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे प्रकरण की जांच एएसपी रविन्द्र कुमार को सौंपी। एएसपी रविन्द्र कुमार करीब तीन बजे गांव मैथना जगतपुर में पहुंचे और वहां अपनी गोपनीय जांच पड़ताल की। एएसपी ने अलग-अलग समुदाय के लोगों से बारीकी से मामले में छानबीन की। बाद में पुलिस द्वारा बनाये गये लुटेरे के घर पहुंचकर जांच पड़ताल की। जांच में आईपीएस आफिसर को कोई ऐसा क्लू नहीं मिल सका जिससे उसके आरोपी होने का पुख्ता सबूत हो। आईपीएस ने उक्त युवक को मामले में निर्दोष पाया है।
पुलिस द्वारा पकडे़ गये लुटेरे सागर ने हेमंत शर्मा का लूट में रंजिशन नाम लिया था। गांव के अधिकतर लोगों से जांच पड़ताल की गई। जिसमें हेमंत लुटेरा नहीं निकला। इंस्पेक्टर की लापरवाही की रिपोर्ट एसएसपी को भेज दी गई है। - रविंद्र कुमार, एएसपी