दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए पांच विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से अंतरराष्ट्रीय बाजार में 100 करोड़ रुपये मूल्य की ड्रग्स बरामद की गई है। इस सिंडिकेट का नेटवर्क मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान और यूनाइटेड किंगडम तक फैला हुआ था। सिंडिकेट व्हाट्सएप के माध्यम से कॉल सेंटर मॉडल के माध्यम से संचालित होता था और स्थानीय नाइजीरियाई नागरिकों के माध्यम से ऐप-स्टाइल फूड डिलीवरी की सुविधा प्रदान करता था। एक ही तस्कर से जुड़े कई देशों के पासपोर्ट मिले हैं। हवाला नेटवर्क और बिचौलियों का इस्तेमाल कर आय को एक नाइजीरियाई शेल कंपनी में पहुंचाया जाता था।
अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त मंगेश कश्यप ने बताया कि इनके कब्जे से मोबाइल फोन, पासपोर्ट, नशीली दवाओं की बिक्री के रिकॉर्ड वाली नोटबुक आदि बरामद किया गया है। इसके अलावा होंडा सिटी कार और 2,07,500 रुपये नकद जब्त किए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ने बताया कि सिपाही हेमंत ने मोती नगर स्थित एक कूरियर कंपनी पर 13 जून को छापेमारी कर एक संदिग्ध पार्सल को रोका। उसमें 895 ग्राम एमडीएमए थी। ये भारतीय सूट और महिलाओं के जूतों की पैकेजिंग के नमूनों के बीच बड़ी चतुराई से छिपाया गया था। इस पार्सल को विदेश भेजा जा रहा था। इंस्पेक्टर अरविंद कुमार की टीम पार्सल की जांच करते हुए कैमरून के नागरिक कामेनी फिलिप तक पहुंची। उसे पकड़ लिया गया।
ये गिरोह सीधे तौर पर नाइजीरियाई नागरिक कैलिस्टस उर्फ कालिस से जुड़ा था। एडोर को कालिस से 7 किलोग्राम कोकीन मिली थी, लेकिन कैलिस ने कैमरून से फिलिप के लिए एक अलग पासपोर्ट का इंतजाम किया और उसे एडोर से कामकाज संभालने के लिए वापस भेज दिया। फिलिप की निशानदेही पर उनके सिंडिकेट के एक सहयोगी फिलिप उर्फ टॉल गाय को 29 जून को गिरफ्तार किया गया। उससे ये पता चला कि उनका सिंडिकेट नाइजीरिया में एक कॉल सेंटर जैसा सेटअप चलाता है, जहां भारतीय ग्राहक व्हाट्सएप नंबरों पर ऑर्डर देते हैं और ग्राहक के सबसे नज़दीकी स्थानीय डिलीवरी बॉय के ज़रिए ड्रग्स की डिलीवरी सुनिश्चित की जाती है।
फिलिप डिलीवरी मैन था
फिलिप उर्फ टॉल गाय ऐसा ही एक डिलीवरी मैन था। वह दक्षिणी दिल्ली और साकेत इलाके में युवाओं को कोकीन और एमडीएमए डिलीवर करता था। उसे नाइजीरिया से यूके के एक नंबर से व्हाट्सएप कॉल आते थे और उसे डिलीवर की जाने वाली ड्रग्स की मात्रा, ग्राहक की कार का नंबर और लोकेशन बताई जाती थी। जानकारी के आधार पर वह ड्रग्स डिलीवर करता और पैसे लेता। एक तयशुदा कारोबार की तरह उसे एक तय समय और दिन पर एक तय जगह पर पहुँचकर कैश डिलीवर करना होता था। उसे कैश लेने और ड्रग्स डिलीवर करने वाले के बारे में पता नहीं होता था। मार्च 2025 में फिलिप के आने से पहले, एडोर सिंडिकेट के सभी कामकाज संभालता था। एडोर को छतरपुर इलाके से गिरफ्तार किया गया।
वसंत कुंज क्षेत्र की औसत बिक्री हर महीने 1 करोड़ से अधिक थी
एडोर ने अपनी सहयोगी विक्टर का नाम बताया। इसके बाद 22 जुलाई को वसंत विहार से इबे चिनेडू ऑस्टिन उर्फ एलिनवा उर्फ विक्टर न्ज़ुबेचुकुवुनवा को गिरफ्तार कर लिया गया। इबे, कलेची का हैंडलर था और केलेची की गिरफ्तारी के बाद, उसने डिलीवरी का काम संभाल लिया। उसने लिंकेज से बचने के लिए कलेची के घर से सबूत भी निकाले। ड्रग की बिक्री का रिकॉर्ड कई नोटबुक में रखा गया था और वर्ष 2019 तक का था। अकेले वसंत कुंज क्षेत्र की औसत बिक्री हर महीने 1 करोड़ से अधिक थी।
ऐसे करते थे सप्लाई
सिंडिकेट ने एक फ़ूड डिलीवरी ऐप-शैली वितरण मॉडल अपनाया, जो ग्राहकों के वास्तविक स्थानों के आधार पर डिलीवरी भेजता था। डिलीवरी एजेंट एक समान ड्रेस कोड का पालन करते थे। ये चेकदार शर्ट और काले हेलमेट पहनते थे, ताकि सामान सौंपते समय ग्राहकों की पहचान सुनिश्चित हो सके। सिंडिकेट ने भारत में स्थानीय एमडीएमए निर्माण इकाइयाँ स्थापित कीं और अंतर्राष्ट्रीय कूरियर सेवाओं का उपयोग करके ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, मलेशिया, जापान और यूनाइटेड किंगडम सहित देशों में इस पदार्थ का निर्यात किया। भारत में एकत्रित नशीली दवाओं की आय को एक अनौपचारिक मुद्रा विनिमय नेटवर्क के माध्यम से लॉन्ड्र किया गया।