राष्ट्रीय खेल हॉकी होने के बावजूद यहां लोग क्रिकेट खेल के दीवाने हैें। विश्व कप से लेकर आईपीएल, 20-20 मैच को देखने और खेलने का खुमार क्रिकेट प्रेमियों को टीवी स्क्रीन के सामने से उठने नहीं देता।
इसका क्रेज इतना ज्यादा है कि हर रविवार को गली-मोहल्ले के युवक क्रिकेट मैच खेलते दिख जाएंगे, लेकिन नहीं दिखती तो वह हैं महिला क्रिकेट खिलाड़ी।
इस मैच में इतना नाम, इज्जत और पैसा होने के बावजूद शहर से कोई महिला क्रिकेट खिलाड़ी आगे नहीं निकली। जबकि यहां से पुरुष क्रिकेट खिलाड़ियों की बात करें तो मोहित शर्मा, विजय यादव, अजय रात्रा, राहुल तेवतिया, मानविंदर बीसला, महेश रावत आदि जैसे चर्चित खिलाड़ी हैं।
ये लोग आईपीएल खेल से लेकर विश्व कप में अपने हुनर का प्रदर्शन दे रहे हैं। शहर में जितनी भी सरकारी और गैर सरकारी अकादमी हैं, वहां प्रशिक्षण ले रहे पुरुषों की संख्या महिलाओं से ज्यादा है।
शहर में बहुत सी ऐसी अकादमी हैं, जहां प्रशिक्षण लेने का हक केवल लड़कों को है। जिलेभर में मुश्किल से 40-50 लड़कियां क्रिकेट का प्रशिक्षण ले रही हैं, जिनमें से दो महिला क्रिकेटर नाहर सिंह स्टेडियम में और 22 लड़कियां एक निजी अकादमी में है।
पुरुषों के बराबर नहीं मिलता फेम
महिला क्रिकेटर दीक्षा, आरती, वर्षा ने बताया कि उन्हें इस गेम में पुरुषों के बाराबर फेम नहीं मिलता और न ही कवरेज। अखबार और टीवी पर हमेशा पुरुषों के विश्व कप, आईपीएल, 20-20 मैच ही दिखाए जाते हैं।
इन खिलाड़ियों को करोड़ रुपये में खरीदा जाता है, लेकिन सरकार की नजर में महिला क्रिकेट मैच का कोई महत्व नहीं दिखाई देता।
यदि शहर से महिला क्रिकेटरों की संख्या बढ़ानी हैं तो इसके लिए हरियाणा सरकार को चाहिए कि वह राज्य स्तर पर समय-समय पर क्रिकेट मैच का आयोजन करे और लड़कियों की सुरक्षा को देखते हुए महिला क्रिकेट अकादमी खुलवाएं।
आज पुरुष क्रिकेटर के नाम बच्चे-बच्चे की जुबान पर हैं, लेकिन महिला क्रिकेट के खिलाड़ियों के नाम शायद ही कोई जानता हो। इसकी वजह महिला क्रिकेट मैच शुरू होने से पहले उनका विज्ञापन न करना है।
दूसरा कारण माता- पिता का लड़कों को क्रिकेट खेलने की पूर्ण आजादी देना और लड़कियों को क्रिकेट के स्थान पर दूसरा खेल खेलने के लिए कहना। एक बार अकादमी ने महिलाओं का प्रशिक्षण टेस्ट लिया।
इसमें 150 लड़कियों ने बहुत खूब गेंदबाजी और बल्लेबाजी की, लेकिन आज माता-पिता के दवाब के चलते कुल 22 लड़कियां ही प्रशिक्षण ले रही हैं। इस गेम में महिला बहुत आगे निकल सकती हैं, लेकिन उन्हें सरकार और माता-पिता के सहयोग की जरूरत है। -संजय कुमार, कोच, निजी क्रिकेट अकादमी
जिले में एक भी महिला क्रिकेट कोच नहीं है। इसलिए भी लड़कियां आगे नहीं आ पा रही है। कुछ महिला क्रिकेट की प्रसिद्धि भी कम है इसलिए ऐसी दिक्कत है। एसपी राणा, जिला खेल अधिकारी