दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के तहत आने वाले श्मशान घाट में अब पेड़ों को बचाने की कवायद शुरू होगी। इसके लिए दाह संस्कार में लकड़ियों की जगह गोबर से बने लट्ठों का इस्तेमाल किया जाएगा। इस संबंध में निगमायुक्त ज्ञानेश भारती से भी इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है।
दरअसल, श्मशान घाट में दाह संस्कार के लिए लकड़ियों के साथ-साथ उपलों की भी व्यवस्था है, लेकिन आकार में छोटा होने के कारण इनका इस्तेमाल कम ही किया जाता है। वहीं, चिता को जलाने के लिए एक क्विंटल से अधिक लकड़ी लग जाती है। जाहिर है इससे पर्यावरण को भी हानि पहुंचती है।
इस संबंध में दक्षिणी निगम के नेता सदन नरेंद्र चावला ने कहा कि एक व्यक्ति अपने जीवन से लेकर मृत्यु तक 20 पेड़ों का इस्तेमाल कर लेता है। वहीं, मृत्यु के बाद भी चिता जलाने के लिए अधिक लकड़ियों की आवश्यकता होती है। इसे देखते हुए हमने श्मशान घाट में गोबर से बने लकड़ी के रूप में बड़े लट्ठों की व्यवस्था करने का प्रस्ताव लाए हैं।
चावला ने बताया कि कुछ सामाजिक संस्थाओं ने इस प्रस्ताव के लिए सहयोग करने की पहल की है। वहीं, कई एजेंसी गोबर से लकड़ी की तरह बड़े लट्ठे बनाने के लिए तैयार भी हो गई हैं। ऐसे में जल्द ही अब लोगों को श्मशान घाट में गोबर से बने लट्ठों की भी सुविधा मिल सकेगी।
लकड़ियों के मुकाबले कम लगेगा शुल्क
चावला ने बताया कि गोबर से बने लट्ठों का शुल्क लकड़ियों के मुकाबले कम होगा। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों पर भी अंतिम क्रिया में अधिक बोझ नहीं होगा। दूसरी ओर गाय का गोबर हमारी संस्कृति से भी जुड़ा हुआ है।
गांव देहात पहल में हो सकेंगे शामिल
श्मशान घाट में गोबर से बने लकड़ियों के लट्ठों की आवश्यकता पूरी करने के लिए दिल्ली के गांव देहातों को इस पहल से जोड़ा जाएगा। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र के लोग निगम को गोबर के लट्ठे उपलब्ध कराएंगे। इस संबंध में नेता सदन चावला ने कहा कि गोबर का एक सीमित इस्तेमाल करने के बाद अक्सर ग्रामीण बाकी गोबर नालियों में बहा देते हैं। ऐसे में गांव देहात में नाले और नालियां अक्सर जाम हो जाती हैं। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों के ड्रेनेज व्यवस्था भी बेहतर होगी। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा।
इन जगहों पर हैं दक्षिणी निगम के शमशान घाट
ग्रीन पार्क, दक्षिणपुरी, बसंत गांव, सुभाष नगर, पंजाबी बाग, सराय काले खां, लोधी रोड