वाराणसी की यह टीम रोजाना संक्रमित क्षेत्रों में जान जोखिम में डालकर काम कर रही है। टीम के सदस्य हौसले को हथियार बनाकर जंग लड़ रहे हैं। डॉ. पांडेय का कहना है कि संक्रमण रोकने की जिम्मेदारी सभी पर है। इसके लिए हर दिन नई सोच के साथ जंग की शुरुआत होती है।
डॉ. पांडेय का कहना है कि कोरोना संक्रमण के खिलाफ इस जंग को सभी के सहयोग से जीतने में लगे हैं। कहा कि फार्मासिस्ट प्रशांत सिंह, मलेरिया इंस्पेक्टर अजय मिश्रा आदि के साथ संक्रमण खत्म करने की चुनौती को अवसर मानकर काम किया जा रहा है। सभी क्षेत्रों में लोगों से घरों से बाहर न निकलने की अपील की जा रही है।
नहीं दिखती चेहरे पर थकान : कोरोना संक्रमित मरीजों के घर जाना हो या फिर किसी संदिग्ध का सैंपल लेना हो या स्क्रीनिंग करनी हो डॉक्टर पांडेय और उनकी टीम के चेहरे पर थकान नहीं दिखती है। लल्लापुरा से लेकर मदनपुरा तक इलाकों में अब तक वह टीम के साथ लोगों को जागरूक करने और सैनिटाइजेशन आदि के काम की बखूबी मानीटरिंग करते रहे हैं।
पांडेय कहते हैं कि दिनभर कोरोना मरीजों के घर और फिर अन्य जगहों पर संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग करने वाले डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ से मिलने के बाद शाम को घर पहुंचने पर पूरी सतर्कता बरतते हैं। कोरोना के खतरे से बचाने के लिए घर में भी सामाजिक दूरी जरूरी है।
हैलट के कोविड-19 वार्ड में 8 से 17 अप्रैल तक कोरोना मरीजों की देखभाल में लगीं स्टाफ नर्स आराधना यादव ड्यूटी पूरी करने के बाद 14 दिनों के लिए होम क्वारंटीन की गई हैं। घर की दूसरी मंजिल पर वह अकेली रह रहीं हैं। दो साल के बेटे को पति अनुज संभाल रहे हैं। आराधना कहती हैं, बेटे को गोद में लिए 19 दिन हो गए हैं। कुछ दिन और बाकी हैं। जब भी बेटे को देखने का दिल करता है दूर से उसे निहार लेती हूं। वो मेरी गोद में आने की जिद करता है, रोता है लेकिन मुझे उससे दूर जाना पड़ता है। उसे देख मेरे आंसू आ जाते हैं। लोग इसे सजा की तरह भले ही देखें, लेकिन मैंने कोरोना के युद्ध में जितना भी योगदान दिया है उस पर मुझे फख्र है। कोरोना संक्रमितों को देख थोड़ा डर तो लगता था, लेकिन अब नहीं है। यह युद्ध हम जीतेंगे।
-आराधना यादव, स्टाफ नर्स, हैलट अस्पताल, कानपुर
वैश्विक कोरोना महामारी को हराने का कोतवाली जानसठ में तैनात महिला आरक्षी सुषमा में जुनून है। वह अपने साथियों के साथ निडर होकर ड्यूटी को निभा रही हैं। वह बुलंदशहर की रहने वाली हैं और करीब ढाई माह से वह छुट्टी पर भी नहीं गई है। परिजनों ने उसके विवाह की तैयारी शुरू कर दी थी। अगले माह मई में उसका रिश्ता तय भी होना था, सिर्फ विवाह की तारीख निर्धारित होनी बाकी रह गई थी। मगर लॉकडाउन में जनता की जान बचाने की जिम्मेदारी की वजह से उसने शादी कराने से इंकार दिया। उसने अपने परिजनों को फोन करके कह दिया कि पहले कोरोना को हराना है, शादी तो फिर भी हो जाएगी। पिता कल्याण सिंह को अपनी बेटी पर नाज है। देश सेवा करने को लेकर पिता ने फिलहाल मई में होने वाली बेटी की शादी को टाल दिया है।
-सुषमा, महिला आरक्षी, जानसठ
परिजनों की फिक्र से दूर कोरोना योद्धा बनकर मरीजों की सेवा कर रहे चीफ फार्मेसिस्ट राजेंद्र प्रसाद सेमवाल कहते हैं कि आज उन पर देश धर्म निभाने का जिम्मा है। इसलिए वह परिवार धर्म की चिंता को भूल कर कोरोना से लड़ने में सरकार की मदद कर रहे हैं। थानाभवन सीएचसी में तैनात चीफ फार्मेसिस्ट राजेंद्र प्रसाद सेमवाल कोरोना के खिलाफ जंग में अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनका परिवार देहरादून के शास्त्री नगर में रहता है। परिवार में पत्नी के अलावा दो बच्चे हैं। जब से बच्चों व पत्नी को यह पता चला है कि उनकी ड्यूटी हॉटस्पॉट इलाके के अस्पताल में है। तब से परिजन चिंतित नजर आते हैं। हर दिन खासतौर पर बच्चे सुबह शाम उन्हें फोन कर उनका हाल जानते हैं। हालांकि उन्हें गर्व है कि उनके पिता कोरोना के खिलाफ जंग में अहम योगदान निभा रहे हैं। इसके साथ ही बच्चे उन्हें स्वयं भी सतर्क रहने की सलाह देते हैं और भगवान से पिता सहित पूरे देशवासियों के स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना भी करते हैं। वह डेढ़ माह पहले घर गए थे, लेकिन फिलहाल उनकी घर जाने की कोई इच्छा नहीं है। क्योंकि इस समय परिवार से ज्यादा उनकी यहां पर जरूरत है। उन्होंने निश्चय किया है कि जब तक देश इस महामारी से मुक्त नहीं हो जाएगा। तब तक वह घर नहीं जाएंगे।
-राजेंद्र प्रसाद, चीफ फार्मेसिस्ट
सीएचसी थानाभवन, शामली