लॉकडाउन के दौरान जरूरी सामानों को छोड़कर अन्य कोई दुकानें नहीं खुल रही हैं। इसी वजह से राष्ट्रीय हेल्पलाइन पर शराब पीने वालों और ड्रग्स सेवन करने वालों के परेशानी से भरे कॉल में 200 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इन आंकड़ों को तमाम राज्य सरकारें भी चिंतित हैं और ऐसे लोगों की तत्काल मदद के बारे में सोच रही हैं।
इसका सबसे बड़ा कारण है शराब की दुकानों का बंद होना और नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोकथाम लगना। इसके साथ ही तंबाकू से बने पदार्थों के न मिलने से लोगों में चिड़चिड़ापन ज्यादा बढ़ गया है। इस तरह के पदार्थों का बाजार से गायब हो जाना सरकार के लिए खुशी की बात होनी चाहिए लेकिन सरकारें इससे खुश नहीं हो सकतीं क्योंकि लोग परेशान हैं।
सामाजिक अधिकारिता मंत्रालय के सोशल डिफेंस डिविजन द्वारा एकत्रित डाटा के अनुसार टोल फ्री नंबर 1800110031 पर 15-21 मार्च के बीच जहां 90 कॉल प्रतिदिन आते थे, वहीं लॉकडाउन के बाद से 266 प्रतिदिन आ रहे हैं, जो 200 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
22 मार्च से लेकर 31 तक जिन राज्यों से सबसे ज्यादा कॉल आए वो हैं- यूपी-73, दिल्ली-34, एमपी- 31, गुजरात-29। एक अप्रैल से कॉल ज्यादा आने लगीं- यूपी- 203, बिहार- 136, महाराष्ट्र- 119, एमपी- 109। जबकि 13 अप्रैल से 21 तक यूपी- 69, बिहार- 68, दिल्ली- 60, महाराष्ट्र- 56।
एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इन कॉल्स में कॉलर्स एंक्जाइटी, थकावट, अकुलाहट से भरे रहते हैं। ऐसा तब होता है जब किसी नशा करने वाले को वो नशा नहीं मिलता। इसके अलावा भी कई तरह के लक्षण इन लोगों में देखे गए इसलिए हेल्पलाइन नंबर पर मौजूद काउंसलर ऐसे लोगों की काउंसिलिंग कर रहे हैं।