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कोविड-19: विचाराधीन कैदियों की अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने के आदेश के लिए पीठ गठित

Fri, 08 May 2020 03:43 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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दिल्ली हाईकोर्ट
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने कोविड- 19 महामारी की वजह से जेलों में भीड़ कम करने के इरादे से अंतरिम जमानत पर रिहा कैदियों की जमानत की अवधि 45 दिन और बढ़ाने के न्यायिक आदेश पारित करने के लिए एक खंडपीठ गठित की है। न्यायिक आदेश के तहत 2,177 विचाराधीन कैदियों को अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था और यह अवधि नौ मई को पूरी हो रही है।

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उच्चाधिकारी समिति की सिफारिश के अनुसार इस समय इन विचाराधीन कैदियों को फिर से जेल में रखना खतरनाक होगा क्योंकि कोविड-19 महामारी का खतरा अभी भी बहुत ज्यादा है।

उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री द्वारा जारी सूचना के अनुसार मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल ने उच्चाधिकार प्राप्त समिति की सिफारिशों पर अमल के लिए शनिवार को न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की दो सदस्यीय पीठ गठित करने का मौखिक निर्देश दिया है।
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न्यायमूर्ति हिमा कोहली की अध्यक्षता में गठित इस उच्चाधिकार प्राप्त समिति की राय है कि चूंकि कोरोना वायरस महामारी का खतरा अब भी बहुत ज्यादा है और विचाराधीन कैदियों के पृथक-वास के लिए पर्याप्त वार्ड बनाने के लिए जेल परिसरों में जगह की कमी है, इसलिए इन्हें दी गयी अंतरिम राहत की अवधि 45 दिन और बढ़ा दी जानी चाहिए।

देश में कोविड-19 महामारी के संक्रमण के मद्देनजर जेलों में कैदियों को इससे बचाने के इरादे से उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देशों पर अमल के लिए इस समिति का गठन किया गया था। समिति की यह राय भी थी कि प्रत्येक 2,177 विचाराधीन कैदी की अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने के लिये अलग अलग आवेदन से न्यायिक समय बर्बाद होगा। इसलिए इन सभी की अंतरिम राहत की अवधि 45 दिन बढ़ाने के लिये एक न्यायिक आदेश उचित रहेगा।

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