2016 में पति के निधन के बाद बेटे के साथ मायके में रह रहीं हैं उषा
सचिन कुमार
नई दिल्ली । एक विधवा याचिकाकर्ता उषा देवी को राहत देते हुए रोहिणी कोर्ट की न्यायाधीश साक्षी जायसवाल ने अंतरिम निषेधाज्ञा जारी कर की है। विधवा के पिता सुखबीर सिंह, भाई जितेंद्र व अजय और भाभी कमलेश 16 जुलाई की अगली सुनवाई तक विधवा और उनके 18 वर्षीय बेटे अर्पित पाल को घर से निकालने से रोक दिया गया है। कोर्ट ने समन और नोटिस जारी करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया।
भाई पर 10 लाख रुपये उगाही का आरोप
2016 में पति दिनेश के निधन के बाद उषा देवी अपने बेटे के साथ मायके आईं। इसके कुछ समय बाद परिवार वालों ने उन्हें मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से परेशान करना शुरू कर दिया। याचिका में आरोप लगाया गया कि भाई जितेंद्र ने उनसे 10 लाख रुपये की उगाही की। इसके बाद तीन लाख रुपये और देने का दबाव बना रहे थे। पंचायत में भाई ने पैसे लौटाने का वादा किया, लेकिन नहीं दिया। वहीं, मार्च में परिवार ने महिला की मंजिल की बिजली काट दी और शौचालय का स्लैब तोड़ दिया। उन्होंने 15 दिनों में घर नहीं छोड़ने पर हत्या की धमकी देने का भी आरोप लगाया है। पुलिस में शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर पीड़िता 28 मार्च को कोर्ट पहुंची।