अदालत ने तिहाड़ जेल परिसर से हत्या के एक आरोपी को जबरन उठाकर ले जाने के मामले में सुभाष पैलेस थाना पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा जिस तरह से आरोपी कार्तिक की गिरफ्तारी हुई है उसमें पूरी तरह से सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हुआ है। अदालत ने पुलिस उपायुक्त को निर्देश दिया कि वह अपने जांच अधिकारियों को कानून का पालन करना सिखाएं और बताएं कि गिरफ्तारी के समय कानून का कैसे पालन किया जाता है।
तिहाड़ जेल परिसर में बनी अदालत के ड्यूटी मजिस्ट्रेट राघव शर्मा ने कहा यह मामला काफी गंभीर है। अदालत ने कहा कि जिस प्रकार पुलिस ने समर्पण करने आए आरोपी को गिरफ्तार किया उसे किसी भी हालत में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत ने कहा एक तरफ पुलिस ने हत्या आरोपी को गिरफ्तार करने की बात कही है। वहीं दूसरी तरफ 23 तारीख को ही उसे हत्यारोपी के आत्मसमर्पण के बारे में अपना पक्ष रखने को कहा गया था और उससे जांच की रिपोर्ट मांगी गई थी। अदालत ने कहा कि इसमें कोई दो मत नहीं कि कानून के तहत पुलिस को आरोपी को गिरफ्तार करने का अधिकार दिया गया है, जिससे जांच में कोई बाधा नहीं हो।
उन्होंने कहा इस अधिकार का प्रयोग धमकाने के लिए नहीं किया जा सकता है। अदालत ने कहा किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी के दौरान उसकी स्वतंत्रता का हनन नहीं होना चाहिए। इस मामले में जिस प्रकार आरोपी की गिरफ्तारी हुई है उसमें पूरी तरह से कानून एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तय दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया गया।
अदालत ने पुलिस द्वारा पेश रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद आरोपी कार्तिक को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इससे पूर्व पुलिस ने आरोपी को पेश करते हुए बताया कि आरोपी को जेल परिसर के बाहर से हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ के बाद हत्या के समय इस्तेमाल स्कूटी बरामद कर ली गई है। आरोपी कार्तिक ही हत्या के इस मामले में मास्टर माइंड है।
पुलिस ने यह भी तर्क रखा कि उसे हत्या के आरोपी कार्तिक के समर्पण की बात पता चली थी। इस के बाद टीम का गठन कर उसे तिहाड़ जेल गेट के पास से गिरफ्तार कर कार से थाने ले जाया गया था।
वहीं क्षेत्रीय एसीपी ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा कि आरोपी को हत्या के मामले में उसके सहयोगी के बयान के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। सह-अभियुक्त पहले से ही गिरफ्तार हो चुका है।
वहीं आरोपी के अधिवक्ता अनवर अहमद ने पुलिस की स्टोरी को गलत बताते हुए कहा कि पुलिस ने जेल परिसर के अंदर से उनके मुवक्किल को मारपीट कर अगवा किया था। उन्होंने कहा जेल सुरक्षाकर्मियों के बयानों से भी इस तथ्य की पुष्टी हो चुकी है। ऐसे में पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
अदालत ने सभी तथ्य देखने के बाद माना कि आरोपी की गिरफ्तारी गलत तरीके से की गई है। साथ ही उन्होंने आरोपी पर लगे हत्या के आरोप को देखते हुए उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया और पुलिस उपायुक्त को निर्देश जारी कर दिया कि किसी भी आरोपी को गिरफ्तार करने में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन होना चाहिए।