अदालत ने आईएसआईएस के 13 आतंकियों को अलग-अलग सजाएं सुनाईं। इन्हें सोशल मीडिया के जरिये युवाओं की भर्ती करने का दोषी पाया गया था। ये भारत में आतंकी वारदात को अंजाम देने के लिए अपने संगठन में युवाओं को भर्ती करने की योजना पर काम कर रहे थे।
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश प्रवीन सिंह ने नफीस खान को 10 वर्ष जबकि अबु अनस, मुफ्ती अब्दुल समी कासमी और मुदब्बिर मुश्ताक शेख को 7 साल और अमजद खान को छह साल कैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने अन्य आठ दोषियों अब्दुल्ला खान, नजमुल हुदा, मोहम्मद अफजल, सुहैल अहमद, मोहम्मद अलीम, मोइनुद्दीन खान, आसिफ अली और सैय्यद मुजाहिद को 5 साल जेल की सजा सुनाई।
न्यायाधीश ने इन दोषियों को आपराधिक साजिश और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत विभिन्न धाराओं में यह सजा सुनाई। इन सभी दोषियों ने अदालत के समक्ष अपना गुनाह कबूल करके समाज में नए सिरे से जीवन शुरू करने के लिए पुनर्वास की मांग की थी।
दोषियों ने गुनाह कबूल करते हुए अदालत से कहा था कि उन्हें उनके द्वारा किए गए अपराध पर बहुत अफसोस है और वे भविष्य में फिर कभी किसी अपराध की घटना में शामिल नहीं होंगे। एनआईए ने 9 दिसंबर 2015 को मामला दर्ज किया था।
आरोपियों ने जुनूद-उल-खलीफा-फिल-हिंद संगठन का गठन किया था, जो भारत में एक खिलाफत की स्थापना करने और आईएसआईएस के प्रति निष्ठा रखने वाले धर्म विशेष के युवाओं की भर्ती कर रहे थे। ये सीरिया में बैठे आईएसआईएस सोशल मीडिया प्रमुख यूसुफ - अल - हिंदी के इशारे पर काम कर रहे थे।