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निर्भया सामूहिक दुष्कर्म मामला : दया याचिका पर फैसले तक नहीं जारी हो सकता डेथ वारंट : कोर्ट

Fri, 29 Nov 2019 10:11 PM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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nirbhaya case
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पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषियों को फांसी की सजा पर अमल की मांग को लेकर दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की। इस दौरान अदालत ने कहा कि जब तक दोषियों की दया याचिका पर फैसला नहीं आता, तब तक डेथ वारंट जारी नहीं किया जा सकता। इस प्रतिक्रिया पर निर्भया की मां के कोर्ट में ही आंसू निकल पड़े। इस मामले में अगली सुनवाई 13 दिसंबर को होगी।
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न्यायाधीश सतीश कुमार अरोड़ा ने कहा कि एक दोषी विनय राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर चुका है। एक अन्य दोषी पवन ने वारदात के समय खुद को नाबालिग बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। नियम के मुताबिक, एक मामले के सभी दोषियों को एक साथ फांसी पर लटकाया जाता है। इसलिए अदालत दोषियों को फांसी की सजा पर अमल का फिलहाल कोई फैसला नहीं ले सकती। 

शुक्रवार को दायर स्टेटस रिपोर्ट में तिहाड़ जेल प्रशासन ने कहा कि दोषी विनय ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के वक्त चारों दोषियों को पेश करने के आदेश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि इस मामले में दोषियों को फांसी दिलाने की मांग लेकर निर्भया के माता-पिता  एक साल से पटियाला हाउस कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं। एक साल पहले उन्होंने चारों दोषियों को जल्द से जल्द फांसी देने की याचिका कोर्ट में दायर की थी। 
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हाल ही में इस मामले की कार्यवाही में तेजी लाने की उम्मीद के साथ उन्होंने सुनवाई अन्य न्यायाधीश को देने की मांग की थी। इसके बाद सुनवाई न्यायाधीश सतीश कुमार अरोड़ा की अदालत में स्थानांतरित की गई थी। 16 दिसंबर 2012 की रात छात्रा के साथ चलती बस में सामूहिक दरिंदगी हुई थी। छात्रा ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। इससे पूरे देश में रोष फैल गया था। जगह-जगह प्रदर्शन किए गए थे। 

दिल्ली में भी जोरदार प्रदर्शन हुआ था। इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई। इस मामले के एक दोषी ने आत्महत्या कर ली थी। एक अन्य नाबालिग को बाल सुधार गृह में भेजा गया, जहां से वह रिहा हो चुका है। चार अन्य दोषी मुकेश, पवन, विनय और अक्षय को फांसी की सजा सुनाई गई है। दोषियों ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दया याचिका दायर की थी, लेकिन इन्हें खारिज कर दिया गया था।
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