अदालत ने कहा, आरोपी रवि कपूर के नेतृत्व में इसके सदस्य अमित शुक्ला, बलजीत सिंह मलिक, अजय कुमार और अजय सेठी विभिन्न प्रकृति की विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे। उनका संगठित अपराध सिंडिकेट है। उनके खिलाफ सौम्या व जिगिषा हत्याकांड का ही मामला नहीं है बल्कि राजधानी के अलावा नोएडा के थानों में विभिन्न मामले दर्ज है। अदालत ने कहा एफआईआर संख्या 69/2009 थाना वसंत विहार और एफआईआर संख्या 63/2009 थाना दिल्ली कैंट की घटना संगठित अपराध थी, जैसा कि आरोपी रवि कपूर द्वारा स्वयं के साथ-साथ उसके संगठित अपराध सिंडिकेट के अन्य सदस्यों द्वारा संचालित संगठित अपराध सिंडिकेट द्वारा किया गया था।
अदालत ने कहा परिस्थितिजन्य साक्ष्य की स्वीकार्यता के कानूनी सिद्धांत मामले के कानून में अच्छी तरह से तय किए गए हैं। अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य, वैज्ञानिक साक्ष्य और चश्मदीद गवाहों को पेश करके आरोपियों का अपराध विधिवत साबित कर दिया है। गवाहों ने रवि कपूर, अमित शुक्ला, अजय कुमार उर्फ अजय, बलजीत सिंह मलिक उर्फ पोपी की पहचान की है, जो कि इकबालिया बयान की पुष्टि करते हैं।
हत्या में इस्तेमाल हथियार से खुला मामला
बलजीत मलिक और दो अन्य रवि कपूर और अमित शुक्ला को पहले 2009 में आईटी पेशेवर जिगिषा घोष की हत्या में दोषी ठहराया गया था। पुलिस ने बताया कि जिगिशा घोष की हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार की बरामदगी से विश्वनाथन की हत्या का मामला सुलझ गया था। ट्रायल कोर्ट ने 2017 में जिगिशा घोष हत्या मामले में कपूर और शुक्ला को मौत की सजा और मलिक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, अगले वर्ष, हाईकोर्ट ने कपूर और शुक्ला की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था और मलिक की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था।