अदालत ने प्रतिष्ठित चित्रकार एम.एफ. हुसैन की दो कलाकृतियों को प्रदर्शित करने के लिए दिल्ली आर्ट गैलरी (डीएजी) के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता सीधे मजिस्ट्रेट के समक्ष सबूत पेश कर सकता है।
अदालत ने प्रदर्शनी के आयोजकों को नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई 12 फरवरी को तय की है। मजिस्ट्रेट ने कहा कि शिकायतकर्ता अमिता सचदेवा के आरोपों का समर्थन करने के लिए आवश्यक सबूत पहले से ही उनके पास हैं या पुलिस ने जब्त कर लिए हैं।
पटियाला हाउस कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट साहिल मोंगा ने कहा इस स्तर पर जांच एजेंसी की ओर से आगे की जांच और सबूतों के संग्रह की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सभी सबूत शिकायतकर्ता के पास हैं और रिकॉर्ड में भी हैं।
अपनी शिकायत में अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने पुलिस को पिछले महीने एक प्रदर्शनी के आयोजकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश देने की मांग की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि प्रसिद्ध कलाकार की दो पेंटिंग जो प्रदर्शित की गई थीं, हिंदू देवी-देवताओं का अश्लील चित्रण थीं।
अदालत अब इस मामले की शिकायत के रूप में सुनवाई करेगी, जिससे सचदेवा को मजिस्ट्रेट के समक्ष सीधे साक्ष्य प्रस्तुत करने की अनुमति मिल जाएगी। सचदेवा ने अपने आवेदन में दावा किया कि उन्हें हुसैन: द टाइमलेस मॉडर्निस्ट प्रदर्शनी के बारे में पता चला और उन्होंने 4 दिसंबर को इसे देखने का फैसला किया। 9 दिसंबर को, उन्होंने संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। चूंकि पुलिस को गैलरी में पेंटिंग नहीं मिलीं, इसलिए उन्होंने बाद में 12 दिसंबर को पटियाला हाउस कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई।
गुरुवार को कोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175(3), जो मजिस्ट्रेट को पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने का अधिकार देती है। इसका इस्तेमाल केवल विवेकपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए न कि तब जब शिकायतकर्ता के पास पर्याप्त सबूत मौजूद हों।