हाईकोर्ट ने पतंगबाजी का समय व स्थान तय करने की मांग वाली जनहित याचिका सुनने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि त्योहार कैसे मनाना है, यह हर व्यक्ति की समझ पर निर्भर करता है। इससे अगर किसी व्यक्ति विशेष को कोई नुकसान हुआ है तो वह कोर्ट आ सकता है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की खंडपीठ ने मोहत घालयान की वह जनहित याचिका खारिज कर दी जिसमें पतंगबाजी के समय व स्थान निर्धारित करने के साथ ही चीनी मांझे के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
इस याचिका में यह भी कहा गया था कि चीनी मांझे पर रोक के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों पर रिपोर्ट मंगाने का निर्देश दिया जाए।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ऋषि पाल ने कोर्ट को बताया कि पतंगबाजी के लिए समय व स्थान निर्धारित किया जाना चाहिए ताकि इससे दूसरे कामों में दिक्कत न आए। सरकार को इसका प्रचार भी करना चाहिए। चीनी मांझे से कई लोगों, पशुओं और पक्षियों की जान गई है।