जिला न्यायाधीश आशीष अग्रवाल ने चार पत्रकारों, रवि नायर, अबीर दासगुप्ता, अयास्कंत दास और आयुष जोशी द्वारा दायर एक याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के खिलाफ कथित असत्यापित और मानहानिकारक सामग्री को प्रकाशित या प्रसारित करने से रोकने वाले आदेश को चुनौती दी गई थी।
रोहिणी कोर्ट ने बृहस्पतिवार को चार पत्रकारों को अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) के खिलाफ कथित मानहानिकारक सामग्री हटाने के आदेश को रद्द कर दिया। जिला न्यायाधीश आशीष अग्रवाल ने चार पत्रकारों, रवि नायर, अबीर दासगुप्ता, अयास्कंत दास और आयुष जोशी द्वारा दायर एक याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के खिलाफ कथित असत्यापित और मानहानिकारक सामग्री को प्रकाशित या प्रसारित करने से रोकने वाले आदेश को चुनौती दी गई थी। अदालत चार पत्रकारों की तरफ से एक सिविल जज के 6 सितंबर के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी।
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एईएल की मानहानि के मामले में कार्रवाई करते हुए सिविल जज ने चार पत्रकारों समेत 10 प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे वेबसाइटों, लेखों और सोशल मीडिया पोस्ट सहित विभिन्न प्लेटफॉर्म पर पहले से प्रकाशित विवादास्पद सामग्री को एक निश्चित अवधि के भीतर हटा लें। हालांकि, जिला अदालत ने कहा कि सिविल जज को आदेश पारित करने से पहले प्रतिवादियों को एक अवसर प्रदान करना चाहिए था, और यह भी बताया कि सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के प्रावधानों को ध्यान में नहीं रखा गया। न्यायाधीश अग्रवाल ने कहा कि आलोचना आदेश टिकने योग्य नहीं है। मैं अपील स्वीकार करता हूं और मामले के गुण-दोष पर कोई निष्कर्ष निकाले बिना ही आलोचना आदेश को रद्द करता हूं। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद मामले को नए सिरे से निर्णय के लिए अदालत में भेज दिया गया।