1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान जनकपुरी-विकासपुरी हिंसा मामले में राउज ऐवन्यू कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा। कोर्ट 22 जनवरी को मामले में फैसला सुनाएगा। मामले में पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार ने कहा था कि वह निर्दोष हैं और कभी इसमें शामिल नहीं थे।
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने सोमवार को पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार के खिलाफ 1984 के सिख दंगों के एक मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने फैसले सुनाने के लिए 22 जनवरी की तरीख तय की है। मामला जनकपुरी और विकासपुरी पुलिस स्टेशनों में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है।
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जनकपुरी का मामला 1 नवंबर, 1984 को दो सिखों, सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या से संबंधित है। दूसरा मामला विकासपुरी पुलिस स्टेशन में 2 नवंबर, 1984 को गुरचरण सिंह को जलाने के मामले में दर्ज हुआ था। सात जुलाई को अपना बयान दर्ज कराते समय पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में अपने ऊपर लगे आरोपों से इन्कार किया था। उन्होंने कोर्ट के सामने कहा था कि वह दंगों की जगह पर मौजूद नहीं थे और उन्हें झूठा फंसाया गया है।
बता दें कि कोर्ट ने 23 अगस्त, 2023 को सज्जन कुमार को हत्या के आरोप से बरी कर दिया था। कोर्ट ने सज्जन कुमार के खिलाफ आईपीसी की धारा 147 (दंगा करने की सजा), 148 (घातक हथियार से दंगा करना), 149 (गैरकानूनी सभा के किसी भी सदस्य की ओर से उस सभा के सामान्य मकसद को पूरा करने के लिए किया गया अपराध), 153 (अलग-अलग समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ाना), 295 (किसी भी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाना या अपवित्र करना), 307 (हत्या का प्रयास), 308 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाने की सजा), 395 (डकैती की सजा) और 426 (शरारत करने की सजा) आदि के तहत आरोप तय किए थे।