हाईकोर्ट ने पासपोर्ट एक्ट व आपराधिक साजिश के 18 साल पुराने मामले में एक एनआरआई को अग्रिम जमानत प्रदान की है। सीबीआई ने यह केस मार्च 2001 में दर्ज किया था। मामला 1997 में पांच सरकारी अधिकारियों के पासपोर्ट चोरी से जुड़ा है। याची पर आरोप है कि वह चोरी के पासपोर्ट पर अमेरिका भाग गया था।
न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने विरसा सिंह गिल की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद अग्रिम जमानत प्रदान की है। कोर्ट ने उसे निर्देश दिया है कि जांच में शामिल होना होगा और सहयोग करेगा। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि उसका पासपोर्ट सीबीआई के पास जमा है और उसके खिलाफ लुक आउट कॉर्नर भी खुला हुआ है।
कोर्ट के समक्ष याचिका पर जिरह करते हुए अधिवक्ता संजीव मलिक व अनुभव मेहरोत्रा ने कहा कि उनका मुवक्किल 1997 से अमेरिका में रह रहा है और अमेरिकी नागरिक है। उसके पास अमेरिकी पासपोर्ट है। वह अक्तूबर 2018 में जब भारत आया तो उसे एयरपोर्ट पर रोककर पूछताछ की गई। इसके बाद भी वह जांच में शामिल हुआ। 17 अक्तूबर 2018 को उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया। वह लगातार जांच में सहयोग कर रहा है।
पेश मामले में सीबीआई ने 16 मार्च 2001 को प्रारंभिक जांच के बाद केस दर्ज किया था। सरकारी अधिकारियों के पांच सरकारी पासपोर्ट 1997 में चोरी हुए थे। इस मामले की करीब सात साल तक जांच के बाद 2008 में कड़कड़डूमा कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। इसमें यह भी कहा गया था कि एक पासपोर्ट पर विरसा सिंह अमेरिका चला गया और वापस नहीं आ रहा है। इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कोर्ट ने सीबीआई को दोबारा जांच का निर्देश दिया था। भारत लौटने तथा जांच में शामिल होने के बाद विरसा सिंह गिल ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिसे निचली अदालत ने खारिज कर दिया था।