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दिल्ली सरकार को हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भले ही राजधानी में ई-रिक्शा को चलाने की खुली छूट प्रदान कर दी हो लेकिन दिल्ली सरकार का मानना है कि ई-रिक्शा का संचालन अवैध व गैरकानूनी रूप से हो रहा है।
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दिल्ली सरकार परिवहन विभाग ने हाईकोर्ट के समक्ष दायर जबाव में उक्त तथ्य का खुलासा किया है। वहीं अदालत ने भी गैरकानूनी रूप से चल रहे ई-रिक्शा पर नाराजगी जताते हुए सरकार को कड़ी फटकार लगाई।

अदालत ने सरकार को एक सप्ताह में स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि आखिर किसके आदेश पर ई-रिक्शा चल रहे हैं।

'लोगों के लिए खतरा है ई-रिक्‍शा'

न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्घार्थ मृदुल की खंडपीठ के समक्ष बुधवार को परिवहन विभाग ने जबाव दाखिल कर बताया कि हमने अदालत के आदेश पर ई-रिक्शा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है।

उन्होंने कहा कि यातायात पुलिस के संयुक्त आयुक्त ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा कि है जिस प्रकार से राजधानी में ई-रिक्शा चल रही है उससे आम लोगों के जीवन को खतरा है।

उन्होंने कहा कि विभाग ने तय किया है कि ई-रिक्शा मोटर वाहन अधिनियम की श्रेणी में आएगी। इतना ही नहीं 24 अप्रैल को टेरी ने भी अपनी रिपोर्ट में ई-रिक्शा को मोटर वाहन कानून के दायरे में लाने को कहा है।
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फोटो देखकर हैरान रह गई अदालत

उन्होंने कहा कि विभाग का मानना है कि वर्तमान में ई-रिक्शा का संचालन अवैध व गैरकानूनी रूप से हो रहा है। हमने दिल्ली पुलिस को ई-रिक्शा के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा है अत: दिल्ली पुलिस से जबाव मांगा जाए कि क्या कारवाई की गई है।

वहीं सुनवाई के दौरान याची ने सामान से लदे ई-रिक्शा की फोटो पेश करते हुए कहा कि सरकार ने अदालत के आदेश के बावजूद अभी तक ई-रिक्शा के खिलाफ कोई कारवाई नहीं की।

अदालत ने फोटो देखकर आश्चर्य जताते हुए कहा कि यह ई-रिक्शा नहीं बल्कि एक ट्रक का समान है। अदालत ने सरकार के जबाव पर असंतोष जताते हुए कहा कि बिना लाईसेंस व बीमा के ई-रिक्शा आखिर सड़को पर किस के निर्देश पर चल रही है। अदालत ने सरकार को मामले में ज्यादा समय प्रदान करने से इंकार करते हुए सुनवाई 30 जुलाई तय कर दी है।
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