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Delhi: अदालत ने पूर्व विधायक नील दमन खत्री को दोषी ठहराया, 2014 में पुलिस पर हमला करने का मामला

Thu, 02 Jan 2025 05:27 AM IST
विजय पुंडीर गौरव बाजपेई, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने खत्री और उनके साथी जोगिंदर दहिया को आईपीसी की धारा 143, 147 149 और 353 के तहत दोषी करार दिया है। अदालत 27 जनवरी को दोषियों की सजा पर बहस करेगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व भाजपा विधायक नील दमन खत्री को भीड़ एकत्र करने और लोकसेवकों पर हमला करने के मामले में दोषी करार दिया है। मामला 2014 के नरेला थाने में हुई प्राथमिकी से जुड़ा है। अवैध निर्माण को ढहाने गई टीम की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर खत्री के नेतृत्व वाली भीड़ ने हाथापाई और पथराव किया। जिसमें तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

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स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने खत्री और उनके साथी जोगिंदर दहिया को आईपीसी की धारा 143, 147 149 और 353 के तहत दोषी करार दिया है। अदालत 27 जनवरी को दोषियों की सजा पर बहस करेगी। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने 24 दिसंबर को आदेश दिया। वहीं, चार आरोपियों राजकुमार, सुरेंद्र, प्रवीण और भीम सेन को आरोपमुक्त कर दिया।

क्या था मामला
पुलिस द्वारा दाखिल रिपोर्ट के अनुसार 14 नवंबर 2014 को तहसीलदार राजकुमार पुलिस टीम के साथ नरेला स्थित अतिक्रमण ढहाने पहुंचे थे। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ ने टीम का रास्ता रोक पथराव कर दिया और जेसीबी के सामने लेटना शुरू कर दिया। इस दौरान तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए।

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पुलिस टीम ने मौके पर आंसू गैस के गोले दागे थे। वहीं, चार लोगों को गिरफ्तार किया था। वहीं, तहसीलदार की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने तत्कालीन विधायक नीलदमन खत्री, उनके साथी जोगिंदर दहिया समेत कुल छह लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए।

छह गवाहों ने लिया विधायक का नाम
अदालत ने आदेश में कहा कि कुल छह गवाहों ने स्पष्ट तौर पर कहा कि, तत्कालीन विधायक खत्री और उनके साथी जोगिंदर दहिया ने लोगों को उकसाया और अतिक्रमण ढहाने के काम को रोकने के लिए कहा। पुलिस के भी चार गवाहों ने भी स्पष्ट तौर पर घटना का जिक्र किया। इसके अलावा वीडियो रिकार्डिंग और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर दोनों को दोषी ठहराया गया।

गंभीर चोट पहुंचाने के आरोपी को मिली जमानत
तीस हजारी कोर्ट ने गंभीर चोट पहुंचाने के एक आरोपी को जमानत दी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि उसकी गिरफ्तारी ‘कानून का स्पष्ट उल्लंघन’ है। अवकाशकालीन न्यायाधीश नीरज शर्मा आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। आरोपी को 20,000 रुपये की जमानत राशि और इतनी ही राशि के एक जमानतदार की जमानत पर रिहा किया गया। अदालत ने 27 दिसंबर को आदेश में कहा कि पुलिस के 7 दिसंबर को नोटिस देने के बाद आरोपी जांच में शामिल हो गया। कानून के अनुसार जांच अधिकारी की तरफ से उसी दिन बिना किसी विशेष कारण के उसे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। आरोपी तरुण पर वजीराबाद पुलिस ने गंभीर चोट पहुंचाने के तहत मामला दर्ज किया था।

बिना पहचान पत्र के एचआईवी पॉजिटिव ट्रांसवुमन का इलाज करंे : हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने लोकनायक अस्पताल को एक एचआईवी पॉजिटिव ट्रांसवुमन का पहचान पत्र मांगे बिना इलाज करने का निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने उसकी याचिका पर दिल्ली सरकार और केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने केंद्र को यह बताने का निर्देश दिया कि क्या उसे पुनर्वास के लिए कोई कौशल प्रशिक्षण दिया जा सकता है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को उसकी स्वास्थ्य स्थिति और दिल्ली में गिरते तापमान को ध्यान में रखते हुए उसके लिए उपयुक्त आश्रय खोजने को कहा। याचिकाकर्ता ने आश्रय के लिए कई गैर सरकारी संगठनों से संपर्क किया था, लेकिन पहचान प्रमाण न होने के कारण उसे अस्वीकार कर दिया गया। अगली सुनवाई 9 जनवरी होगी।
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