अदालत की तरफ से नियुक्त कोर्ट कमिश्नर से पुलिस की मौजूदगी में बदसलूकी व यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप को रोहणी कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। जिला न्यायाधीश विनोद यादव ने मामले में हरियाणा पुलिस के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिदेशक व मुख्य सचिव से नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
अदालत ने पूछा है कि 10 मई को घटनास्थल पर क्या हुआ, इस संबंध में रिपोर्ट तैयार करके देने का आदेश दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 26 मई के लिए तय की है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा, यह गंभीर मामला है। ऐसे में आगे बढ़ने से पहले इस मामले में स्थानीय पुलिस से रिपोर्ट मांगना सही होगा।
मामले में अदालत ने अपने आदेश के तहत वकील आयुष राठौर को प्रतिवादियों के परिसर का दौरा करने और प्रतिवादियों की तरफ से वादी के ट्रेडमार्क के उल्लंघन के बारे में अदालत को रिपोर्ट करने के लिए स्थानीय आयुक्तों में से एक के रूप में नियुक्त किया था। आवेदन के अनुसार, स्थानीय आयुक्त ने 2 मई के आदेश का पालन करने के लिए 10 मई को उस परिसर का दौरा किया, जहां प्रतिवादी की मां ने बताया कि वह परिसर में नहीं है।
इसके बाद प्रतिवादियों ने स्थानीय आयुक्त कमीशन के काम में बाधा डालने के लिए उनके कार्य में अड़चने डालीं। यही नहीं, प्रतिवादियों ने अनावश्यक अराजकता पैदा करने के लिए स्थानीय मीडिया कर्मियों को भी बुलाया और जानबूझकर स्थानीय आयुक्त के साथ गरमागरम बहस की। यहां तक कि उनके साथ मारपीट भी की।
कोर्ट कमिश्नर ने महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की
याचिका में आगे कहा गया कि इसी दौरान कुछ महिलाएं मौके पर आईं और कोर्ट कमिश्नर से आक्रामक तरीके से भिड़ गईं। साथ ही, अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इस दौरान कोर्ट कमिश्नर ने महिलाओं को उनके वहां निरीक्षण करने के पीछे का उद्देश्य समझाने की कोशिश की, तो घटनास्थल पर मौजूद महिलाओं ने उन्हें यौन उत्पीड़न के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी।
इस घटना को लेकर कोर्ट कमिश्नर ने अदालत को उनके साथ महिलाओं की तरफ से किए गए अपमान को बताया। ऐसे में प्रतिवादियों और मौके पर मौजूद महिलाओं के खिलाफ न्यायालय की अवमानना अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू करने की अपील की। साथ ही, न्यायालय की तरफ से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि उनके पूछने के बावजूद भी महिलाओं ने अपनी पहचान उजागर नहीं की।