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1984 सिख विरोधी दंगा: भीड़ का मकसद ही था सिखों की हत्या करना- कोर्ट

Thu, 15 Nov 2018 03:00 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भीड़ का मकसद ही सिख समुदाय के लोगों की हत्या करना था। दोनों दोषी हरदेव व अवतार की हत्या करने वाली भीड़ के सक्रिय सदस्य थे। यह तल्ख टिप्पणी अदालत ने 34 साल पुराने सिख दंगों में दो लोगों की हत्या के मामले में फैसला सुनाते हुए की।

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय पांडेय ने फैसले में कहा कि भीड़ के नारों व जिस तरह से इस अपराध को अंजाम दिया गया, उससे साफ है कि दंगाई भीड़ ने जान बूझकर सामूहिक मंशा से हरदेव सिंह व अवतार सिंह की हत्या की।

अदालत ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष नरेश सेहरावत व यशपाल सिंह के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में कामयाब रहा है। चश्मदीद गवाहों संगत सिंह व कुलदीप सिंह, गवाह सुरजीत सिंह व एसआई जयपाल सिंह के बयानों से साफ है कि यह दोनों दंगा करने वाली भीड़ का हिस्सा थे।

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1984 में कत्लेआम का वो मंजर....

अदालत ने फैसले में कहा कि भीड़ ने न केवल हिंसा की बल्कि सुरजीत सिंह के घर व संगत सिंह, कुलदीप सिंह व हरदेव की दुकान से सामान भी लूटा और उसके बाद आग लगा दी। इस समय नरेश के हाथ में मिट्टी के तेल का डिब्बा था। नरेश से सुरजीत के घर के दरवाजे पर तेल डाला और यशपाल ने माचिस से वहां आग लगा दी।  

एक नवंबर 1984 की सुबह नौ बजे करीब एक हजार लोगों की भीड़ ने सुरजीत सिंह के घर का दरवाजा व खिड़कियां तोड़ दीं। सुरजीत सिंह के घर छिपे अवतार सिंह, सुरजीत सिंह, कुलदीप सिंह, संगत सिंह व हरदेव सिंह को बाहर निकाल लिया।

भीड़ ने पीड़ितों को मारने की नीयत से सुरजीत के मकान की पहले मंजिल से नीचे फेंक दिया। पहली मंजिल से नीचे गिरने पर हरदेव सिंह व अवतार सिंह की मौत हो गई। इसी तरह फेंके जाने से सुरजीत सिंह, संगत सिंह व कुलदीप सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। अदालत ने कहा कि अगर इन लोगों की मौत हो जाती तो यह पूरी भीड़ इन लोगों की हत्या की दोषी मानी जाती।
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