नशे में धुत पियक्कड़ चालक सुसाइड बम से कम नहीं है। यह टिप्पणी जिला अदालत ने शराब पीकर वाहन चलाने के दोषी चालक की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुये की है। अदालत ने दोषी की पांच दिन की सजा को कायम रखा है।
सापेत जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गिरीश कठपालिया ने दोषी चालक सचिन कुमार की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुये कहा कि शराबी चालक न केवल अपनी बल्कि दूसरों की जिंदगी भी खतरे में डालता है। नशे में वाहन चलाने के खतरनाक नतीजों को अदालत ने अनदेखा नहीं कर सकता।
अदालत ने यह टिप्पणी सचिन कुमार की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुये की है। सचिन ने नेकचलनी पर छोडने का आग्रह अदालत से किया था। उसका कहना था कि उसने केवल बीयर पी थी और उसके वकील ने उसे जुर्म स्वीकार करने के नतीजों के बारे में नहीं बताया था।
बता दें कि सचिन ने खुद अपने जुर्म स्वीकार किया था जिसके बाद कोर्ट ने उसे पांच दिन कैद, छह माह के लिये लाइसेंस रद करने व 35 सौ रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
अदालत ने कहा इस बात पर यकीन नहीं किया जा सकता कि बीयर पीने से खून में एल्कोहल की मात्रा तय सीमा से 300 फीसदी अधिक पाई जायेगी।
अभियोजन के मुताबिक दक्षिण पूर्वी जिला पुलिस ने सचिन को 24 मार्च को नशे की हालत में वाहन चलाते हुये पकड़ा था। पुलिस ने उसके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था।