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रिश्तों की कमजोर होती डोर: पति तवज्जों नहीं देते तो कहीं जीवनसाधी के बराबर कमाने की हनक, तलाक तक पहुंच रही बात

Wed, 21 Feb 2024 07:49 AM IST
आकाश दुबे अमर उजाला, आशुतोष यादव, गाजियाबाद

सार

राजनगर एक्सटेंशन में रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दो साल पहले इंजीनियर युवती के साथ शादी हुई थी। पति का पैकेज 9 और पत्नी का 10 लाख का है। पत्नी ने तलाक की अर्जी लगाई है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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ये तीन केस बानगी हैं कि कैसे पर्याप्त समय न दे पाने और तानों से जीवनसाथी के बीच बढ़ते चिड़चिड़ेपन ने रिश्तों की बुनियाद कमजोर कर दी है। रिश्तों का सॉफ्टवेयर ऐसा बिगड़ गया है कि दो साल के बाद ही नौबत तलाक तक पहुंच जा रही है। गाजियाबाद के परिवार न्यायालय में बीते एक साल में 1,462 दंपती ने अलग रहने की राह चुनी है। इसमें 976 ने आपसी सहमति से तलाक लिया। इनमें से 35 से 40 फीसदी मामले सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के हैं। वहीं, दूसरे नंबर पर शिक्षक हैं, जिनके 15 से 20 फीसदी मामले हैं।

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परिवार न्यायालय के मुकदमों की पैरवी करने वाले अधिवक्ता राजकुमार चौहान बताते हैं कि आधे से ज्यादा मामलों में तलाक की अर्जी पत्नी की ओर से दी गई। इनमें कहा गया कि पति सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। बहुत ज्यादा तनाव में रहता है और उसे समय नहीं दे पाता है। ऐसे में साथ रहने का क्या फायदा? ऐसे ही एक मामले में एक साल तक केस लड़ने के बाद दोनों ने सहमति से अलग होने का निर्णय किया। कोर्ट ने भी उनकी सुनी और तलाक मिल गया। सहमति न होने वाले केस में सुनवाई चल रही है। जनवरी 2023 से दिसंबर तक तलाक के कुल 3657 मामलों का निस्तारण हुआ है।

पैकेज 19 लाख का, पर नहीं रहना साथ
राजनगर एक्सटेंशन में रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दो साल पहले इंजीनियर युवती के साथ शादी हुई थी। पति का पैकेज 9 और पत्नी का 10 लाख का है। पत्नी ने तलाक की अर्जी लगाई है, क्योंकि पति उन्हें समय नहीं देते हैं। 

...तो साथ क्यों रहें
क्रॉसिंग रिपब्लिक निवासी शिक्षिका के पति नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। सुबह 8 से रात 10 बजे तक ऑफिस में रहते हैं। पत्नी ने तलाक की अर्जी लगाई है। कहती हैं, पति तवज्जो नहीं देते, तो साथ रहने का कोई फायदा नहीं है।
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कमाती तो मैं भी हूं...
इंदिरापुरम की महिला निजी कंपनी में एचआर मैनेजर है। आईटी इंजीनियर से प्रेम विवाह हुआ था। तीन साल की बेटी है। उन्होंने तलाक की अर्जी लगाई है। कहती हैं, पति के बराबर कमाती हूं, तो ताने क्यों सहूं?
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