हाईकोर्ट ने नाबालिग बच्ची को घर में नौकरानी रखने वाले दंपती पर दर्ज एफआईआर खारिज करने की एवज में देसी प्रजाति के छह फीट ऊंचे 100 पेड़ लगाने व पीड़िता को डेढ़ लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने बच्ची को दंपती के यहां नौकरानी रखवाने वाले आरोपी एजेंटों को पड़ों को लगाने व उनकी देखभाल करने में श्रमदान करने का निर्देश दिया। अदालत ने इन दोनों को भी दस-दस हजार रुपये का मुआवजा पीड़िता को देने के लिए कहा है। साथ ही 50 पेड़ भी लगाने होंगे।
सभी आरोपियों को दक्षिण जिला उप वन संरक्षक से संपर्क करने और दस दिनों के भीतर पेड़ लगाने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि पेड़ देशी प्रजाति के साढ़े तीन साल की आयु तथा कम से कम छह फुट ऊंचे होने चाहिए। पेड़ लगाए जाने के बाद उप वन संरक्षक उनकी तस्वीरों सहित शपथ पत्र पेश कर 25 मार्च तक कोर्ट को अगवत करवाएंगे।
पेश मामले में राजौरी गार्डन थाने में बंधुआ मजदूरी, चोट पहुंचाने तथा जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि बच्ची को एजेंटों के जरिए काम पर लगाया गया था और वह करीब तीन माह से दंपती के घर में बंधक थी। बच्ची को आरोपी एजेंट उसके पिता की सहमति से लेकर आए थे। बच्ची को काम करने की एवज में दंपती कोई पैसे भी नहीं देते थे और गलती होने पर उसकी पिटाई की जाती थी।
इन प्रजातियों के लगाने होंगे पेड़
अदालत ने कहा कि वन अधिकारी विचार करें कि गुलर, कदंब, पिलखां, जामुन, बरगद, आम, अमलतास, महुआ, पुत्रंजीवा, बढ़, सागवान, सफेद साइरिस, काला साइरिस, अंजीर, पलाश, अर्नी, रोहिड़ा के पेड़ जहां जैसी मिट्टी है उसकी प्रकृति के आधार पर लगाए जाएं।
बच्ची को उसके पिता की सहमति से लाए थे एजेंट
आरोप है कि बच्ची को दंपती ने तीन माह से बंधक बना रखा था। दोनों एजेंट उसे उसके पिता की सहमति से दिल्ली लेकर आए थे और दंपती के यहां घरेलू नौकरानी रखवाया था। दंपती उसे शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते थे और काम के बदले पैसे भी नहीं देते थे। इसकी शिकायत बाल कल्याण समिति को भी दी गई थी। समिति ने दंपती को निर्देश दिए थे कि पीड़िता को मेहनताना देने के साथ ही मुआवाज दे।