जंतर-मंतर पर उपकरणों की कार्यक्षमता की स्थिति रिपोर्ट तलब
दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को जंतर मंतर पर उपकरणों की कार्यक्षमता की स्थिति के बारे में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने यह निर्देश संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याची ने आरोप लगाया कि अदालत के सितंबर 2010 के उस आदेश का पालन नहीं किया जा रहा, जिसमें एएसआई ने यह वादा किया था कि राष्ट्रीय स्मारक को उसकी क्षमता के अनुसार उसके मूल गौरव को बहाल किया जाएगा। वहां उपलब्ध खगोलीय उपकरणों को क्रियाशील बनाया जाएगा। मामले की सुनवाई 24 अप्रैल तय की गई है।
एएसआई को चार सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश
याचिकाकर्ता ने कहा कि वर्तमान कार्यवाही में केंद्रीय मुद्दा यह है कि जंतर-मंतर स्मारक पर उपकरण कार्यात्मक स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि 12 साल बीत जाने के बावजूद चीजें अपरिवर्तित हैं। याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने 20 जनवरी को एक आदेश पारित किया था, जिसमें उसने एएसआई को चार सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया और विशेष रूप से स्मारक पर उपकरणों के कार्यात्मक रूप से मौजूदा स्थिति के संबंध में अपना रुख निर्धारित किया। अदालत ने याचिकाकर्ता से यह भी कहा कि वह एएसआई के हलफनामे को जमा करने के बाद उसका जवाब दाखिल करें। अदालत ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 2010 में एएसआई की ओर से दिए गए एक वचन को दर्ज करते हुए एक आदेश पारित किया था कि जंतर-मंतर को कार्यात्मक बनाया जाएगा और इसकी मूल महिमा को बहाल किया जाएगा।