इंडिया अगेंस्ट करप्शन से लोगों को ईमानदारी का पाठ पढ़ाकर सियासत में उतरे अरविंद केजरीवाल के शासन में दिल्ली में भ्रष्टाचार बढ़ा है। खासकर उन विभागों में जिन पर सिर्फ दिल्ली सरकार का प्रशासनिक अधिकार है, उनमें ही सबसे अधिक भ्रष्टाचार बढ़ा है। वहीं भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात रही भाजपा शासित एमसीडी में भ्रष्टाचार कम हुआ है। इस बात का खुलासा ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल और सीएमएस इंडिया के सर्वे में हुआ है।
सर्वे के मुताबिक पूरे भारत में दिल्ली में भ्रष्टाचार नवें नंबर पर है जबकि भाजपा शासित गुजरात सबसे कम भ्रष्ट है। साल 2018 के सर्वे में शामिल लोगों में से 46 फीसदी लोगों ने यह स्वीकार किया है कि उन्होंने अपना कोई काम करवाने के लिए किसी न किसी सरकारी अधिकारी को घूस दिया।
सर्वे के मुताबिक साल 2015 में जब केजरीवाल ने सत्ता संभाली थी, दिल्ली के 20% लोगों ने यह स्वीकार किया था कि राजधानी में करप्शन होता है। साल 2016 में यह आंकड़ा बढ़कर 25 फीसदी पहुंच गया। वर्ष 2018 में 34 फीसदी लोगों ने भ्रष्टाचार में घूस देने की बात स्वीकार किया।
सीएमएस कंपनी के मुताबिक साल 2016 में दिल्ली के सिर्फ 16 फीसदी परिवारों ने यह स्वीकार किया था कि राजधानी में भ्रष्टाचार होता है। उस समय राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 31 फीसदी था। जबकि इस वर्ष यानी 2018 में दिल्ली के 29 फीसदी परिवारों ने दिल्ली में भ्रष्टाचार होने की बात स्वीकार किया। इस लिहाज से दिल्ली में भ्रष्टाचार का स्तर राष्ट्रीय स्तर से भी दो फीसदी अधिक पाया गया है।
पूरे राष्ट्रीय स्तर पर लोगों से यह सवाल किया गया कि पिछले एक साल में उन्होंने कितनी बार सरकारी अधिकारियों को घूस दिया? इस सवाल के जवाब में गुजरात के लोगों ने सबसे कम बार घूस देने की बात स्वीकार किया। जबकि राजधानी दिल्ली इस लिस्ट में नवें नंबर पर है। देश के तेरह राज्यों में उत्तर प्रदेश इस लिहाज से सबसे ज्यादा भ्रष्ट साबित हुआ जहां के लोगों को सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ा।