भाजपा ने दिल्ली सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। भाजपा का कहना है कि सरकार ने बिना तैयारी के इलेक्ट्रिक बसें खरीदने के लिए टेंडर जारी कर दिया है। 1000 इलेक्ट्रिक बसों की टेंडर प्रक्रिया इसलिए की, क्योंकि बीते चार वर्ष केजरीवाल सरकार निजी कंपनियों के साथ भ्रष्टाचार करने के लिए मिलीभगत करने में लगी थी। निजी कंपनियों ने जब सरकार की भ्रष्टाचार की शर्तों को मान लिया, तो बसों की खरीद के लिए टेंडर जारी कर दिया गया।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि 1000 इलेक्ट्रिक बसों की टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार किया गया है। विधानसभा नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि सरकार ने बिना किसी तैयारी के 1000 इलेक्ट्रिक बसों को उतारने के लिए स्वीकृति दी है। सरकार के पास फिलहाल न तो बस डिपो है और न ही बसों की चार्जिंग के लिए बिजली की व्यवस्था। जिन 6 बस डिपो में बसें लाने की स्वीकृति दी गई है, उनमें से पांच तो धरातल पर ही नहीं हैं। विनोद नगर, बुराड़ी संरक्षित वन क्षेत्र में डिपो बनाने के लिए वन विभाग से अनुमति तक नहीं ली गई है।
बमनोली में डिपो बनाने के जमीन तक हस्तांतरित नहीं हुई है। मुंढ़ेला कला में अभी खेती हो रही है, तो सराय काले खां में मारुति ड्राइविंग स्कूल चल रहा है। बसों की चार्जिंग के लिए बिजली की व्यवस्था भी नहीं है। पॉवर डिपार्टमेंट की मूल रिपोर्ट के अनुसार अभी 24 महीने लगेंगे। मूल रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक बसों की चार्जिंग के लिए 66 केवी कनेक्शन की आवश्यकता होनी चाहिए, जिसे स्थापित करने के लिए 18 से 24 महीने का समय लगेगा।