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भ्रष्टाचार मामला: सीबीआई के पूर्व निदेशकों के खिलाफ जांच में देरी को लेकर कोर्ट ने कहा- प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन

Tue, 17 Nov 2020 09:16 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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राउज एवेन्यू कोर्ट ने मीट निर्यातक मोइन अख्तर कुरैशी और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में धीमी जांच को लेकर मंगलवार को सीबीआई को फटकार लगाई। इस मामले में सीबीआई के दो पूर्व निदेशकों रंजीत सिन्हा और ए.पी. सिंह की भूमिका भी सामने आई, जिसे लेकर जांच जारी है।

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विशेष न्यायाधीश संजीव अग्रवाल ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से सवाल पूछते हुए कहा कि चार साल बीत चुके हैं, लेकिन कोई जांच नहीं हुई। सीबीआई इस मामले की जांच पूरी करने में और कितने साल लगाएगी? कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि क्या सात से दस और साल लगा देंगे? कोर्ट ने कहा मामले में एक सीबीआई निदेशक अभियुक्त है और एजेंसी खुद मामले की जांच कर रही है। न्यायाधीश ने हैरानी जताते हुए कहा कि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन है।

मोइन कुरैशी को 2017 में हैदराबाद स्थित व्यवसायी सतीश सना बाबू के माध्यम से धन एकत्र करने और सीबीआई जांच को प्रभावित करने के लिए फंड का उपयोग करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
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इस मामले में निचली अदालत के आदेशों में से चार आदेशों, सात अगस्त, 26 अगस्त, 26 सितंबर और 27 अक्टूबर को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, जो सूचीबद्ध हैं। हाईकोर्ट द्वारा इन आदेशों पर रोक नहीं लगाए जाने के कारण ट्रायल कोर्ट ने मामले को 24 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दिया।

इससे पहले अदालत ने सितंबर में भी जांच की धीमी गति को लेकर सीबीआई को फटकार लगाई थी। अदालत ने सीबीआई को मामले की जांच पर स्थिति रिपोर्ट 27 अक्तूबर तक दाखिल करने का भी निर्देश दिया था।

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