वर्ष 2002 में त्रिनगर के निगम पार्षद आत्माराम गुप्ता की हुई थी। पुलिस जांच के दौरान कड़ियां जोड़ती चली गई और इस मामले में जो खुलासा हुआ वह बेहद चौंकाने वाला था। आत्माराम गुप्ता की हत्या की साजिश उनके साथ ही काम करने वाली महिला पार्षद शारदा जैन ने रची थी। हत्या प्रेम प्रसंग में हुई थी और शारदा जैन ने इसके लिए भाड़े के हत्यारों की मदद ली थी।
24 अगस्त 2002 को त्रिनगर के निगम पार्षद आत्माराम गुप्ता सुबह साढ़े दस बजे फिरोजशाह कोटला मैदान में कांग्रेस की रैली में भाग लेने निकले थे। रात को घर नहीं पहुंचने पर परिवार वालों ने केशवपुरम थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
जब निगम पार्षद का कोई पता नहीं चला तो पुलिस ने 25 अगस्त को अपहरण का मामला दर्ज कर लिया। जांच में पुलिस को पता चला कि वह अपनी टाटा इंडिका कार से शारदा जैन के केशवपुरम स्थित घर गए थे। जहां से वह शारदा जैन के साथ कार से रैली में गए थे।
इस आधार पर पुलिस ने शारदा जैन से पूछताछ शुरू की। शुरू में वह पुलिस को गुमराह करती रहीं और बयान बदलती रहीं। निगम पार्षद ने पुलिस को बताया कि रैली से लौटते वक्त लगभग दो बजे बस अड्डे के समीप रिंग रोड पर आत्माराम गुप्ता के कुछ जानकार मिल गए थे और वे वहीं कार से उतर गए थे।
लेकिन शारदा जैन उस स्थान को नहीं बता पाई। शारदा जैन के ड्राइवर ओमप्रकाश से पूछताछ के दौरान पुलिस को कुछ और ही तथ्य मिले। ओमप्रकाश ने पुलिस को बताया कि रैली से बाहर आने के बाद आत्माराम गाजियाबाद जाने के लिए कह रहे थे। शारदा जैन वहां जाने से इनकार कर रही थीं।
पुलिस की कड़ी पूछताछ में शारदा जैन ने कबूल कर लिया कि उसने भाड़े के हत्यारों से निगम पार्षद की हत्या कराई है। उन्होंने बताया कि उन्होंने पश्चिमी उत्तरप्रदेश के दो लोगों को गुप्ता की हत्या के 60 हजार रुपये की सुपारी दी थी। रैली से निकलकर वह जमीन दिखाने के बहाने आत्माराम गुप्ता को गाजियाबाद की तरफ ले गई थी और नहर के समीप भाड़े के दोनों हत्यारों ने उसे दो गोलियां मारकर हत्या कर दी।
पुलिस ने 27 अगस्त को शारदा जैन, उसके भाई राजकुमार को गिरफ्तार कर लिया। 31 अगस्त को बुलंदशहर के बराला गांव के नहर से आत्माराम गुप्ता का शव मिला। 6 सितंबर को पुलिस ने पुष्पेंद्र नाम के शूटर और 17 सितंबर को दूसरे शूटर निर्विकार को गिरफ्तार कर लिया। बाद में पुलिस ने 30 सितंबर को राजेंद्र नाम के सहअभियुक्त को भी गिरफ्तार कर लिया।