दिल्ली में बढ़ते कोरोना वायरस के मामले पर लगाम लगाने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों मिलकर कोशिश कर रही हैं। इसी क्रम में गुरुवार को दिल्ली में कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए एक प्लाज्मा बैंक की शुरुआत की गई। यह देश का पहला प्लाज्मा बैंक है।
आपको बता दें कि कोरोना मरीजों के इलाज में प्लाज्मा थैरेपी काफी कारगर साबित हो रही है। इसके लिए सरकार उन लोगों से प्लाज्मा दान करने की अपील कर रही है जो लोग कोरोना से पूरी तरह स्वस्थ्य हो चुके हैं। हालांकि प्लाज्मा दान करने के लिए एक प्रोटोकॉल भी बनाया गया है। इसके तहत गर्भवती हो चुकी महिलाएं प्लाज्मा दान नहीं कर सकती हैं।
अधिकारियों द्वारा जारी किए गए मापदंडों के अनुसार गर्भवती हो चुकी महिलाएं प्लाज्मा दान नहीं कर सकती। डॉक्टरों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान कुछ एंटीबॉडी विकसित हो जाती हैं और इससे प्राप्तकर्ता को नुकसान पहुंच सकता है।
गर्भवती महिला के प्लाज्मा दान को लेकर पूछने पर आईएलबीएस के डॉक्टर जो प्लाज्मा बैंक टीम का हिस्सा भी हैं, उन्होंने बताया कि जब महिला गर्भावस्था के दौरान बच्चे के खून के संपर्क में आती है तो वो ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन (एचएलए) एंटीबॉडी विकसित कर लेती है। जो श्वेत रक्त कोशिकाओं पर एंटीजन के खिलाफ निर्देशित होती हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार एचएलए एंटीबॉडी उस व्यक्ति के लिए हानिकारक नहीं है, जिन्होंने उन्हें बनाया है, लेकिन अगर किसी अन्य व्यक्ति को उनका प्लाज्मा दिया जाए तो प्राप्तकर्ताओं को जटिलता पैदा हो सकती है, जिसे ट्रांसफ्यूजन-संबंधित एक्यूट लंग इंजरी (टीआरएएलआई) के रूप में जाना जाता है।
भारत के पहले प्लाज्मा बैंक का उद्घाटन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को राज्य के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बायिलरी साइंसेज (आईएलबीएस) में किया।
हालांकि इसके लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं कि वर्तमान में कौन प्लाज्मा दान करने के योग्य है और कौन नहीं है।
दिशा-निर्देशों के अनुसार 18-60 वर्ष के लोग, जो पूरी तरह से कोरोना वायरस से उबर चुके हैं और उनमें 14 दिनों से कोई लक्षण नहीं दिखा है, वो दान के लिए जा सकते हैं।
जबकि कोई व्यक्ति जिसका वजन 50 किलोग्राम से कम हो, महिलाएं जिन्होंने कभी गर्भधारण किया हो या कैंसर सर्वाइवर हो या जिनकों गुर्दे, हृदय, फेफडे या लीवर की बीमारी हो वे प्लाज्मा दान नहीं कर सकते ।
एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि प्लाज्मा दान करने वालों के लिए कड़े मानदंड हैं और वास्तविक प्रक्रिया शुरू होने से पहले उनकी काउंसिलिंग तथा स्क्रीनिंग की जाती है और इस तरह से हर प्लाज्मा दाता को दो से ढाई घंटे लगते हैं।
उन्होंने बताया कि हम टीटीआई जांच करते हैं। प्लाज्मा दान करने वालों को एचआईवी, हेपेटाइटिस बी या सी, सिफलिस आदि रोग नहीं होने चाहिए। उन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप या किडनी संबंधी समस्याएं भी नहीं होनी चाहिए।
कोविड-19 से स्वस्थ हो चुके लोगों में इस बीमारी से लड़ सकने वाले एंटीबॉडी विकसित हो जाते हैं जिन्हें प्लाज्मा के जरिए किसी अन्य रोगी के उपचार के दौरान उसके शरीर में डाला जाता है।