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दिल्ली के आसपास कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या बनी अस्पतालों के लिए बड़ी चुनौती, खत्म हुईं टेस्ट किट्स!

Sat, 06 Jun 2020 03:40 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • जांच किट और बिस्तरों की कमी से जूझ रहे हैं अस्पताल
  • दिल्ली सरकार को केंद्र से चाहिये और ज्यादा मदद 
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कोरोना जांच करता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI (फाइल फोटो)
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विस्तार
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भारत में कोविड-19 संक्रमण का पहला संक्रमित चीन के वुहान से जनवरी 2020 के आखिरी सप्ताह में आया था। संक्रमण के डर ने 22 मार्च को जनता कर्फ्य, 25 मार्च को लॉकडाउन लगवाया, लेकिन जैसे जैसे दिल्ली और आसपास कोरोना के मरीजो की संख्या बढ़ रही है केंद्र और दिल्ली सरकार के अस्पतालों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

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अस्पतालों में कोरोना जांच और बिस्तरों की कमी भी हो रही है। केंद्र सरकार के तमाम दावों के बावजूद एम्स और आरएमएल जैसे अस्पतालों मे अभी तक समुचित इंतजाम नहीं हो पाए हैं।
 

इस वजह से राजधानी दिल्ली में संक्रमितों का इलाज और जांच के लिए भटकने का दर्द बढ़ता जा रहा है। एच.एन बरनवाल को ही ले लीजिए। वह अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं।

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अभी यही कंफर्म नहीं है कि उन्हें कोविड-19 है या नहीं। वरुण वत्स की कहानी भी कोई कम नहीं है। कोरोना के खिलाफ दिल्ली सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है, लेकिन मरीजों की बढ़ती तादाद देखते हुए उसे केंद्र से और ज्यादा मदद की दरकार है।

एचएन बरनवाल कहते हैं

दिल्ली में मौजपुर के पास रहते हैं। अस्थमा के मरीज हैं। उम्रदराज हैं। पिछले कुछ दिनों से सिरदर्द, सांस लेने में तकलीक काफी कमजोरी का अनुभव हो रहा था। बुखार भी आ रहा था, जो तीन-चार दिन से नहीं आ रहा है।

तीन-चार दिन पहले बरनवाल सरकारी अस्पताल पहुंचे। चिकित्सक ने कोविड-19 संक्रमण की संभावना बताकर गुरुतेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल भेज दिया। जीटीबी अस्पताल में वह डा. तोमर (रेजीडेंट) ने उन्हें देखा और राजीव गांधी अस्पताल में जाने की सलाह दी।

बरनवाल राजीव गांधी अस्पताल पहुंचे। वहां उन्हें कोविड-19 सस्पेक्ट होने की सलाह दी गई और जीटीबी वापस भेज दिया गया। जीटीबी अस्पताल ने हाथ खड़े कर दिए।

6 जून को बरनवाल किसी तरह प्रयास करके राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मेडिकल सुपरिटेडेंट के कार्यालय पहुंचे। वहां से ट्रामा सेंटर भेजे गए।

चिकित्सक ने देखा। कोविड-19 सस्पेक्ट मानते हुए कहा कि वह सफदरजंग या एम्स चले जाएं। वहां के लिए रेफर कर दिया। बताया गया कि राम मनोहर लोहिया में बिस्तर खाली नहीं है।

बरनवाल एम्स में पहुंचकर अभी लाइन में लगे हैं।

वरुण वत्स की कहानी भी सुनिए

वरुण वत्स रोहिणी में रहते हैं। उनके कजिन की टेस्ट रिपोर्ट कोविड-19 पॉजिटिव आई। कुछ दिन बाद वरुण को भी बुखार, सिरदर्द, सर्दी जुकाम शुरू हुआ।

उन्होंने आरोग्य सेतु एप को डाउनलोड किया। केन्द्र सरकार के हेल्पलाइन नंबर, दिल्ली सरकार के हेल्प लाइन नंबर पर काफी देर तक मशक्कत की। कुछ देर बाद नंबर मिला तो उन्हें दो जून को बाबा साहब अंबेडकर अस्पताल, रोहिणी जाकर टेस्ट कराने के लिए कहा गया।

02 जून को वरुण बाबा साहब भीमराव अंबेडकर अस्पताल पहुंचे। तीन-चार घंटे इंतजार करते रहे। अंत में काउंटर तक पहुंचे तो उन्हें दो दिन बाद परीक्षण के लिए आने का समय दिया गया।

वरुण के व्हाट्सएप संदेश के अनुसार 4 जून को सुबह 10.15 बजे वह फिर अस्पताल पहुंचे। करीब ढाई-तीन घंटे इंतजार के बाद जब काउंटर तक पहुंचे तो बताया गया कि ऊपर की अथॉरिटी से टेस्टिंग की अनुमति नहीं मिली है।

वरुण हारकर फिर आरोग्य सेतु, हेल्पलाइन नंबर का सहारा लेने लगे। काफी मशक्कत के बाद उनके पास कॉल आई। फोन पर बताया गया कि वह अग्रसेन अस्पताल, रोहिणी गेट नंबर दो पर चले जाएं।

वहां जाने पर वरुण की तरह 20-25 लोग और मिले। गेट पर गार्ड ने बताया कि टेस्ट किट खत्म हो गई है। जांच नहीं हो रही है। वरुण की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है।

अंत में तबियत खराब होने पर उन्होंने निजी लैब से जांच कराने का मन बनाया। कॉल करने पर पता चला कि दिल्ली में मामले बढ़ रहे हैं। जांच ज्यादा हो रही है।

टेस्ट किट खत्म है, दो-तीन दिन बाद संपर्क करें।

मरता क्या न करता। झुंझलाहट फ्रस्टेशन, गुस्सा, खराब स्वास्थ्य तीनों के तालमेल ने तकलीफ काफी बढ़ा दी थी। हारकर वरुण ने दिल्ली सरकार के कुछ वॉलेंटियर्स से संपर्क सूत्र बनाए।

वरुण के मुताबिक इसके बाद उनकी जांच हो सकी। फिलहाल वह क्वारंटीन हैं।

एलएनजेपी, आरएमएल की सुनिए

एलएनजेपी अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि संक्रमित ज्यादा हैं। अस्पताल में बिस्तर कम। मरीज आ जाते हैं, उनके पास दूसरे अस्पताल में रेफर करने का दूसरा चारा नहीं है।

डा. पॉल बताती हैं कि कई ऐसे मरीज भी कैजुअल्टी में आ रहे हैं, जिनमें कोविड-19 के संक्रमण की संभावना नहीं है, लेकिन दूसरे मरीजों के संपर्क में आने से वह संक्रमित हो जा रहे हैं।

आरएमएल अस्पताल के वरिष्ठ स्टाफ ने बताया कि उनके पास बिस्तर नहीं है। उनके पास सैकड़ों संक्रमित या संक्रमण के संदेह वाले लोग आ रहे हैं। जांच के लिए भी इंतजाम अभी सीमित है।

ऐसे में उनके पास दूसरे अस्पतालों में रेफर करने का ही चारा है।

बरनवाल जैसे कई मरीज ऐसे हैं जो कई अस्पतालों में भटक रहे हैं और उन्हें अभी बिस्तर या सही जांच की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।

बरनवाल की दिक्कत यह भी है कि कदाचित उन्हें कोविड-19 का संक्रमण न हो। जो स्वास्थ्यगत समस्या है भी उसका इलाज कराएं तो कहां कराएं? लिहाजा अभी नसीब में भटकना ही है।

 

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