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दिल्ली लॉकडाउनः अंडरपास में गुजार रहे दिन, न मिल रही रहने को जगह न हो पा रहा इलाज

Fri, 10 Apr 2020 05:57 PM IST
पूजा त्रिपाठी अभिषेक पांचाल, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

-एक माह पहले बीमारियों का इलाज कराने एम्स आए थे लोग सैकड़ों लोग
-एम्स की ओपीडी बंद होने के कारण नहीं हो पा रहा इलाज
-लॉकडाउन के कारण घर भी नहीं जा पा रहे
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लॉकडाउन के चलते एम्स में एक महीने पहले इलाज कराने आए लोग अंडरपास में बिता रहे दिन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना वायरस के खतरे के बीच कई लोग ऐसे भी हैं, जो दिल्ली के एम्स अस्पताल के पास बने अंडरपास मेंं अपना समय गुजार रहे हैं। इन लोगों को न तो कहीं रहने का ठिकाना मिला और न ही रैन बसेरों में जगह।

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यह सैकड़ों लोग देश के अलग-अलग राज्यों से उपचार की विशेष सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए एम्स अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन लॉकडाउन के दौरान यहीं फंसे रह गए। इन लोगों को अब कोरोना के प्रकोप के खत्म होने का इंतजार है। जिससे यह अपना इलाज करा के घर लौट सकें।

दरअसल, कोरोना के बढ़ते प्रभाव के कारण एम्स अस्पताल में ओपीडी बंद कर दी थी। इस अस्पताल में ये लोग किडनी और हृदय संबंधी रोगों एवं अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आए थे, लेकिन एम्स में इस समय कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है।
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ऐसे में इन लोगों का इलाज नहीं हो पा रहा है और लॉकडाउन के कारण यह लोग अपने घर भी नहीं जा पा रहे हैं। अब ये लोग एम्स के पास बने अंडरपास में ही रह रहे हैं। इन लोगों को आसपास के रैनबसेरों में भी जगह नहीं मिली। इनके लिए अंडरपास में ही रैनबसेरा बना दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दिल्ली सरकार ने पर्याप्त शेल्टर होम की व्यवस्था नहीं है?

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गंदगी और बदबू में रह रहे हैं लोग

एम्स के पास बने इस अंडरपास में काफी गंदगी है। जिस प्रकार से ये लोग यहां रह रहे हैं। उससे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा है। अंडरपास में रह रहे लोगों को देखकर लगता है कि इनमें से कुछ लोगों को तुरंत इलाज की जरूरत है।

अंडरपास में रह रहे विजय कुमार बताते हैं कि वह एक महीने पहले यहां अपनी किडनी का इलाज कराने आए थे। उनको डायलिसिस के लिए 24 मार्च की तारीख मिली थी, लेकिन इतनें में देश में लॉकडाउन घोषित हो गया।

उन्होंने कहा कि 'यहां ना तो जांच हो रही है और ना ही इलाज हो रहा है। हमारे पास पैसे भी नहीं बचे हैं। सबसे अच्छा होगा कि हम अपने घर लौट सकें, लेकिन लॉकडाउन के कारण ऐसा भी नहीं कर सकते।

खाना बांटने वालों से खाना लेकर भरते हैं पेट

अंडरपास में रह रहे लाल सिंह बताते है कि रोजाना एम्स के आसपास काफी लोग खाना बांटते हैं। यहां रह रहे अधिकतर लोग उसी भोजन को खाकर पेट भरते हैं। उन्होंने बताया कि अंडरपास के सामने एक रैनबसेरा है, लेकिन उसमें उन्हें जगह नहीं मिल सकी। अब तो उन्हें इंतजार है तो सिर्फ लॉकडाउन खुलने का, जिससे वह घर जा सकें।
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