एम्स के पास बने इस अंडरपास में काफी गंदगी है। जिस प्रकार से ये लोग यहां रह रहे हैं। उससे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा है। अंडरपास में रह रहे लोगों को देखकर लगता है कि इनमें से कुछ लोगों को तुरंत इलाज की जरूरत है।
अंडरपास में रह रहे विजय कुमार बताते हैं कि वह एक महीने पहले यहां अपनी किडनी का इलाज कराने आए थे। उनको डायलिसिस के लिए 24 मार्च की तारीख मिली थी, लेकिन इतनें में देश में लॉकडाउन घोषित हो गया।
उन्होंने कहा कि 'यहां ना तो जांच हो रही है और ना ही इलाज हो रहा है। हमारे पास पैसे भी नहीं बचे हैं। सबसे अच्छा होगा कि हम अपने घर लौट सकें, लेकिन लॉकडाउन के कारण ऐसा भी नहीं कर सकते।
खाना बांटने वालों से खाना लेकर भरते हैं पेट
अंडरपास में रह रहे लाल सिंह बताते है कि रोजाना एम्स के आसपास काफी लोग खाना बांटते हैं। यहां रह रहे अधिकतर लोग उसी भोजन को खाकर पेट भरते हैं। उन्होंने बताया कि अंडरपास के सामने एक रैनबसेरा है, लेकिन उसमें उन्हें जगह नहीं मिल सकी। अब तो उन्हें इंतजार है तो सिर्फ लॉकडाउन खुलने का, जिससे वह घर जा सकें।