जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ संदीप कौशिक कहते हैं कि आमतौर पर कोरोना मरीजों की संख्या हर दिन बढ़ रही है। ऐसे में माना जा सकता है कि अस्पतालों से मिलने वाली जानकारी बुलेटिन में न हो लेकिन अस्पतालों में 1500 की जगह 1429 मरीज ही भर्ती रहने की बात समझ नहीं आई।
वहीं जन स्वास्थ्य संगठन से ही जुड़े विवेक बंसल का कहना है कि दिल्ली सरकार के अनुसार 30 में से 12 मौत आरएमएल अस्पताल में हुई हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि सरकार अपने हेल्थ बुलेटिन में मृतकों की जानकारी स्पष्ट क्यों नहीं दे रही? किस अस्पताल में कितने मरीजों की मौत हुई? कोरोना वायरस के अलावा उन मरीजों की केस हिस्ट्री क्या थी? इसके बारे में बुलेटिन में कुछ भी जिक्र नहीं है।
उधर दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। जबकि इसी विभाग के एक अधिकारी ने पहचान छिपाने की शर्त पर हेल्थ बुलेटिन में बदलाव की वजह पर कहा कि सबकुछ सीएम कार्यालय से ही चल रहा है।