कोरोना के मामले में प्रशासन की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। खबर है कि उत्तरी दिल्ली के मजनू-का-टीला गुरुद्वारा में 29 मार्च से 205 लोग ठहरे हुए थे, लेकिन गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की तरफ से पंजाब सरकार को इसकी जानकारी देने के बावजूद इन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोई कोशिश नहीं की गई।
गुरुद्वारा कोरोना संक्रमण के खतरे के बाद लोगों की मदद करने के मामले में सबसे आगे रहे हैं। इस गुरूद्वारा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सामने इस बात का प्रस्ताव रखा था कि अगर सरकार लोगों को आइसोलेट करने के लिए क्वारंटीन सेंटर बनाने के लिए जगह की तलाश कर रही है, तो वे इसके लिए जगह देने को तैयार हैं।
अरविंद केजरीवाल ने गुरुद्वारा की इस पहल का स्वागत भी किया था, लेकिन अभी तक जरूरत न पड़ने के कारण ऐसा नहीं किया गया। मजदूरों के पलायन की खबर सामने आते ही गुरुद्वारों ने भूखे लोगों को खाना खिलाने का काम भी शुरू कर दिया था। गुरुद्वारा बंगला साहिब और गुरुद्वारा रकाब गंज में इस समय भी भारी संख्या में डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी रह रहे हैं क्योंकि इन्हें स्थानीय लोगों के द्वारा परेशान करने का मामला सामने आया था।
निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात के 1500 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने की खबर सामने आने के बाद मीडिया में यह खबर सुर्खियां बन गई। लोगों ने इस मुद्दे पर सवाल खड़ा करना शुरू कर दिया कि जब लोगों के एक जगह पर एकत्र होने पर प्रतिबंध है तब इस तरह लोगों को इकट्ठा क्यों होने दिया गया?
इनमें से कई लोगों की तेलंगाना और अन्य राज्यों में कोरोना संक्रमण से मौत भी हो गई है। इस खबर पर तीखी प्रतिक्रिया होने के बाद गुरुद्वारा मजनू-का-टीला का मामला भी लोगों की जानकारी में सामने आया और इसके बाद मजदूरों को वहां से हटाया गया।