सोनू गोयल की किराने की दुकान है। सोनू बताते हैं कि पिछले तीन-चार दिन से सुबह नौ बजे से रात बारह बजे तक ग्राहकों से फुर्सत नहीं है। एकाध ग्राहक ही एक या दो सामान लेने आ रहा है। बाकी ग्राहक थोक में सामान ले जा रहे हैं। सोनू बताते हैं उनका महीने से डंप पड़ा माल करीब-करीब खाली हो गया है।
बिशन सेठ बताते हैं कि सोने-चांदी की दुकान पर ग्राहक नहीं आ रहे हैं। कारण साफ है, लोगों को कोरोना वायरस के डर के कारण अब खाने-पीने, पैसे बचाए रखने की चिंता सता रही है। प्रकाश उत्तराखंड से प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं। प्रकाश का कहना है कि उन्होंने लोगों को मकान दिखाकर एडवांस पेमेंट दिला दी थी।
सदर बाजार के थोक बाजार में कई दुकानदारों ने बताया कि उनके पास इस समय खूब आर्डर आ रहे हैं। मसाला, चावल, दाल, तेल, घी के थोक, फुटकर दुकानदारों को सामान चाहिए।
बंटी गुर्जर सामान ढोने वाला छोटा ट्रक चलाते हैं। बताते हैं उनके पास माल पहुंचाने के लिए दुकानदारों का काफी दबाव है। बंटी का कहना है कि पिछले कुछ दिन से काम बढ़ा है, लेकिन पता नहीं आगे भी यह रफ्तार रहेगी या नहीं।
डीटीसी बसें, क्लस्टर बसें खाली जा रही हैं। बहुत कम बसों में सीट पर बराबर यात्री दिखाई मिले। लोगों ने निजी वाहन से चलना शुरू कर दिया है। कुसुम गुप्ता के घर के सामने मेट्रो स्टेशन है और 50 मीटर पर बस स्टाप। उन्हें कामकाज के लिए कनॉट प्लेस आना पड़ता है।
लेकिन कुसुम इस समय अपनी कार से आ रही हैं। कई साल बाद वह ऐसा कर रही हैं। कुसुम का कहना है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट भले ही सैनेटाइज किया जा रहा हो, लेकिन संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।