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कोरोना वायरसः दिल्ली में लोगों ने खरीद डाला 'थोक' में दो महीने का राशन, सड़कें हुईं खाली

Sat, 21 Mar 2020 07:36 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • लोगों को डर, कहीं लॉक डाउन न हो जाए दिल्ली
  • जनता कर्फ्यू ने बढ़ा दिया लोगों में घबराहट
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कोरोना से सतर्कता बरतते लोग - फोटो : पीटीआई (सांकेतिक)
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विस्तार
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सोनू गोयल की किराने की दुकान है। सोनू बताते हैं कि पिछले तीन-चार दिन से सुबह नौ बजे से रात बारह बजे तक ग्राहकों से फुर्सत नहीं है। एकाध ग्राहक ही एक या दो सामान लेने आ रहा है। बाकी ग्राहक थोक में सामान ले जा रहे हैं। सोनू बताते हैं उनका महीने से डंप पड़ा माल करीब-करीब खाली हो गया है।

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यही स्थिति पवन गुप्ता की है। पवन गुप्ता सोसाइटी में बंद ठेले में सब्जी बेचते हैं। पवन के अनुसार पहले आधी सब्जी सोसाइटी में और आधी बाजार में बेचते थे। शुक्रवार से ठेलाभर सब्जी सुबह दस बजते-बजते बिक गई।

बताते हैं सोसाइटी के के लोगों ने सप्ताहभर की सब्जी एक ही दिन खरीद ली। पवन का कहना है कि अब साधारण आलू 30 रुपये किलो, बैगन 60 रुपये किलो, सीताफल 40 रुपये किलो, हरी मटर 60 रुपये किलो बेच रहे हैं। तीन दिन पहले उन्हें यही सब्जियां 10 रुपये प्रतिकिलो कम की दर से बेची थीं। पूछने पर पवन बताते हैं कि गाजीपुर मंडी में भी अचानक सब्जी मंहगी हो गई है।

सोने-चांदी की दुकान पर ग्राहक नदारद

बिशन सेठ बताते हैं कि सोने-चांदी की दुकान पर ग्राहक नहीं आ रहे हैं। कारण साफ है, लोगों को कोरोना वायरस के डर के कारण अब खाने-पीने, पैसे बचाए रखने की चिंता सता रही है। प्रकाश उत्तराखंड से प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं। प्रकाश का कहना है कि उन्होंने लोगों को मकान दिखाकर एडवांस पेमेंट दिला दी थी।

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15-21 मार्च के बीच में तीन-चार ग्राहकों को बचे पैसे की किस्त का भुगतान करना है, लेकिन ग्राहक इससे पीछे हट रहे हैं। सभी का कहना है कि दो महीने का और समय ले लिया जाए। अभी वे किसी तरह की खरीद-फरोख्त के मूड में नहीं हैं।

सदर बाजार में आर्डर ही आर्डर

सदर बाजार के थोक बाजार में कई दुकानदारों ने बताया कि उनके पास इस समय खूब आर्डर आ रहे हैं। मसाला, चावल, दाल, तेल, घी के थोक, फुटकर दुकानदारों को सामान चाहिए।

बंटी गुर्जर सामान ढोने वाला छोटा ट्रक चलाते हैं। बताते हैं उनके पास माल पहुंचाने के लिए दुकानदारों का काफी दबाव है। बंटी का कहना है कि पिछले कुछ दिन से काम बढ़ा है, लेकिन पता नहीं आगे भी यह रफ्तार रहेगी या नहीं।

सड़क पर बसें हैं, यात्री नहीं, निजी वाहन निकले

डीटीसी बसें, क्लस्टर बसें खाली जा रही हैं। बहुत कम बसों में सीट पर बराबर यात्री दिखाई मिले। लोगों ने निजी वाहन से चलना शुरू कर दिया है। कुसुम गुप्ता के घर के सामने मेट्रो स्टेशन है और 50 मीटर पर बस स्टाप। उन्हें कामकाज के लिए कनॉट प्लेस आना पड़ता है।

लेकिन कुसुम इस समय अपनी कार से आ रही हैं। कई साल बाद वह ऐसा कर रही हैं। कुसुम का कहना है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट भले ही सैनेटाइज किया जा रहा हो, लेकिन संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।

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